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वैश्विक और राष्ट्रीय पर्यावरण पहल

पर्यावरणीय चुनौतियों की सीमा-पार प्रकृति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी देश अकेले इन समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता है। इसी अहसास ने वैश्विक स्तर पर कई संस्थानों, समझौतों और पहलों को जन्म दिया है। इन वैश्विक प्रयासों के समानांतर, भारत जैसे देशों ने भी अपनी विशिष्ट पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने और अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कई महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किए हैं। ये वैश्विक और राष्ट्रीय पहलें एक स्थायी भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक कार्रवाई के महत्व को रेखांकित करती हैं।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम): 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद स्थापित। मुख्यालय: नैरोबी, केन्या।
  • IPCC (जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल): 1988 में स्थापित, यह जलवायु विज्ञान पर आकलन रिपोर्ट प्रदान करता है।
  • GEF (वैश्विक पर्यावरण सुविधा): प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों (जैसे CBD, UNFCCC) के लिए एक वित्तीय तंत्र के रूप में कार्य करता है।
  • स्वच्छ भारत मिशन: 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान।
  • नमामि गंगे कार्यक्रम: 2014 में गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और उसे पुनर्जीवित करने के लिए एक एकीकृत मिशन।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में COP21 के दौरान शुरू की गई एक पहल। मुख्यालय: गुरुग्राम, भारत।

वैश्विक पहल (Global Initiatives)

1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme – UNEP), संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर एक अग्रणी वैश्विक पर्यावरण प्राधिकरण है। यह वैश्विक पर्यावरण एजेंडा निर्धारित करता है, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर सतत विकास के पर्यावरणीय आयाम के सुसंगत कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है, और वैश्विक पर्यावरण के लिए एक आधिकारिक हिमायती के रूप में कार्य करता है।

2. जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC)

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change – IPCC), जलवायु परिवर्तन से संबंधित विज्ञान का आकलन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का निकाय है। यह नीति निर्माताओं को नियमित वैज्ञानिक आकलन प्रदान करता है जो उन्हें जलवायु नीतियां विकसित करने में मदद करते हैं।

3. वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF)

वैश्विक पर्यावरण सुविधा (Global Environment Facility – GEF) की स्थापना 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर की गई थी। यह दुनिया की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने में मदद करने के लिए एक वित्तीय तंत्र के रूप में कार्य करता है। GEF जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय जल, भूमि क्षरण और रासायनिक प्रदूषण जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए धन प्रदान करता है।

4. हरित जलवायु कोष (Green Climate Fund – GCF)

GCF की स्थापना UNFCCC के वित्तीय तंत्र के रूप में की गई थी ताकि विकासशील देशों को उनके GHG उत्सर्जन को कम करने (शमन) और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने (अनुकूलन) में मदद मिल सके। यह जलवायु वित्त के लिए दुनिया का सबसे बड़ा समर्पित कोष है।

राष्ट्रीय पहल (भारत) (National Initiatives – India)

1. स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)

यह भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया अब तक का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है। इसके शहरी घटक का एक प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और खुले में शौच को खत्म करना है। इसका दूसरा चरण (SBM 2.0) भारत को ‘कचरा-मुक्त’ बनाने और स्थायी स्वच्छता पर केंद्रित है।

2. नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme)

यह एक एकीकृत संरक्षण मिशन है जिसे जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लैगशिप प्रोग्राम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था। इसका दोहरा उद्देश्य राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण का प्रभावी उन्मूलन और उसका संरक्षण और कायाकल्प करना है।

3. जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC)

जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change – NAPCC) का शुभारंभ 2008 में किया गया था। यह उन उपायों की पहचान करता है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला करने के लिए सह-लाभ प्रदान करते हुए विकास के लक्ष्यों को बढ़ावा देते हैं। इसके तहत 8 राष्ट्रीय मिशन हैं, जिनमें राष्ट्रीय सौर मिशन और सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।

4. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) को 2019 में लॉन्च किया गया था। यह एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है जिसका उद्देश्य पूरे देश में वायु प्रदूषण की समस्या का व्यापक रूप से समाधान करना है। इसका लक्ष्य 2024 तक 132 गैर-प्राप्ति शहरों (non-attainment cities) में कण पदार्थ (PM) की सांद्रता में 20-30% की कमी लाना है (आधार वर्ष 2017)।
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