परिचय: स्पर्श कोण (Angle of Contact)
स्पर्श कोण (θ) वह कोण है जो द्रव और ठोस की संपर्क सतह पर, द्रव की सतह पर खींची गई स्पर्श रेखा और ठोस की सतह के बीच द्रव के अंदर बनता है। यह कोण यह निर्धारित करता है कि कोई द्रव किसी ठोस सतह को भिगोएगा या नहीं।
ससंजक और आसंजक बलों की भूमिका
स्पर्श कोण का मान दो प्रकार के बलों के बीच संतुलन पर निर्भर करता है:
- ससंजक बल (Cohesive Force): एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल (जैसे, पानी-पानी के अणुओं के बीच)।
- आसंजक बल (Adhesive Force): विभिन्न पदार्थों के अणुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल (जैसे, पानी-कांच के अणुओं के बीच)।
1. जब आसंजक बल > ससंजक बल
जब द्रव और ठोस के अणुओं के बीच आकर्षण बल, द्रव के स्वयं के अणुओं के बीच के आकर्षण बल से अधिक होता है, तो द्रव ठोस की सतह पर फैल जाता है और उसे गीला कर देता है।
- द्रव की सतह (meniscus) अवतल (concave) होती है।
- स्पर्श कोण न्यून कोण (θ < 90°) होता है।
- उदाहरण: कांच की सतह पर पानी।
2. जब ससंजक बल > आसंजक बल
जब द्रव के स्वयं के अणुओं के बीच आकर्षण बल, द्रव और ठोस के अणुओं के बीच के आकर्षण बल से अधिक होता है, तो द्रव बूंद बनाने की प्रवृत्ति रखता है और सतह को गीला नहीं करता है।
- द्रव की सतह (meniscus) उत्तल (convex) होती है।
- स्पर्श कोण अधिक कोण (θ > 90°) होता है।
- उदाहरण: कांच की सतह पर पारा।
विभिन्न युग्मों के लिए स्पर्श कोण
| ठोस-द्रव युग्म | स्पर्श कोण (θ) | परिणाम |
|---|---|---|
| साधारण पानी और कांच | लगभग 8° | न्यून कोण, पानी कांच को भिगोता है। |
| शुद्ध पानी और चांदी | 90° | सतह समतल रहती है। |
| पारा और कांच | लगभग 135° | अधिक कोण, पारा कांच को नहीं भिगोता है। |
| पानी और पैराफिन मोम | लगभग 107° | अधिक कोण, पानी मोम को नहीं भिगोता है। |
स्पर्श कोण को प्रभावित करने वाले कारक
- ठोस और द्रव की प्रकृति: यह सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
- तापमान: तापमान बढ़ाने पर आमतौर पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, जिससे स्पर्श कोण भी बदल जाता है।
- अशुद्धियाँ: द्रव या ठोस की सतह पर अशुद्धियाँ स्पर्श कोण को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकती हैं (जैसे, डिटर्जेंट पानी का पृष्ठ तनाव कम कर देता है)।