Gyan Pragya
No Result
View All Result
  • Quiz
  • Polity
  • Geography
  • Economics
  • Science
  • Uttarakhand
  • GK
  • History
  • Environment
  • Hindi
Gyan Pragya
No Result
View All Result

पृष्ठीय ऊर्जा और पृष्ठीय तनाव

पृष्ठ तनाव (Surface Tension)

पृष्ठ तनाव द्रव का वह गुण है जिसके कारण उसकी मुक्त सतह एक खिंची हुई झिल्ली की तरह व्यवहार करती है और न्यूनतम क्षेत्रफल प्राप्त करने का प्रयास करती है। यह द्रव के अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बल (cohesive force) के कारण होता है।

  • सूत्र: T = F / L
  • जहाँ F द्रव की सतह पर खींची गई काल्पनिक रेखा पर लगने वाला बल है और L उस रेखा की लंबाई है।
  • इसका SI मात्रक N/m है।
  • उदाहरण: पानी की बूंदों का गोलाकार होना, पानी की सतह पर कीड़ों का चलना।

पृष्ठ ऊर्जा (Surface Energy)

किसी द्रव की सतह के क्षेत्रफल में एकांक वृद्धि करने के लिए पृष्ठ तनाव के विरुद्ध किए गए कार्य को पृष्ठ ऊर्जा कहते हैं। यह द्रव की सतह में संग्रहीत अतिरिक्त स्थितिज ऊर्जा है।

पृष्ठ तनाव और पृष्ठ ऊर्जा में संबंध

किया गया कार्य (W) = पृष्ठ तनाव (T) × क्षेत्रफल में वृद्धि (ΔA)
W = T × ΔA
अतः, पृष्ठ ऊर्जा संख्यात्मक रूप से पृष्ठ तनाव के बराबर होती है। इसलिए पृष्ठ तनाव का एक अन्य मात्रक J/m² भी है।

स्पर्श कोण और केशिकत्व (Angle of Contact and Capillarity)

स्पर्श कोण (Angle of Contact)

द्रव और ठोस की संपर्क सतह पर, द्रव की सतह पर खींची गई स्पर्श रेखा और ठोस की सतह के बीच द्रव के अंदर बने कोण को स्पर्श कोण कहते हैं।

  • जो द्रव ठोस को भिगोते हैं (जैसे पानी और कांच), उनके लिए स्पर्श कोण न्यून कोण (< 90°) होता है।
  • जो द्रव ठोस को नहीं भिगोते (जैसे पारा और कांच), उनके लिए स्पर्श कोण अधिक कोण (> 90°) होता है।

केशिकत्व (Capillarity)

बहुत पतली नली (केशनली) में द्रव के ऊपर चढ़ने या नीचे उतरने की घटना को केशिकत्व कहते हैं। यह पृष्ठ तनाव के कारण होता है।

  • उदाहरण: लालटेन की बत्ती में तेल का ऊपर चढ़ना, स्याही सोखते द्वारा स्याही का सोखना, पौधों में जड़ों से पानी का ऊपर चढ़ना।

संख्यात्मक उदाहरण

उदाहरण

प्रश्न: साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव 0.03 N/m है। 2 cm त्रिज्या के साबुन के बुलबुले को बनाने में कितना कार्य करना पड़ेगा?

हल:
दिया है:
T = 0.03 N/m
r = 2 cm = 0.02 m

साबुन के बुलबुले की दो मुक्त सतहें (एक अंदर और एक बाहर) होती हैं।
एक सतह का प्रारंभिक क्षेत्रफल = 0
एक सतह का अंतिम क्षेत्रफल = 4πr²
कुल क्षेत्रफल में वृद्धि (ΔA) = 2 × (4πr²) = 8πr²

किया गया कार्य, W = T × ΔA
W = 0.03 × 8 × 3.14 × (0.02)²
W = 0.24 × 3.14 × 0.0004
W ≈ 0.0003014 J
W ≈ 3.01 × 10⁻⁴ J

Previous Post

Bernoulli’s Theorem– बर्नौली का प्रमेय

Next Post

Angle of Contact– संपर्क कोण

Next Post

Angle of Contact– संपर्क कोण

वर्नियर कैलिपर्स और स्क्रू गेज का उचित उपयोग

ऊष्मा और ऊष्मा स्थानांतरण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी कंप्यूटिंग: हिंदी टाइपिंग , पेज लेआउट और कंप्यूटर पर हिंदी का प्रयोग।

May 12, 2026

देवनागरी लिपि: इसका विकास, गुण-दोष और इसमें सुधार के प्रयास।

May 12, 2026

Dialects of Uttarakhand

May 12, 2026

हरिशंकर परसाई: जीवन परिचय और प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ

May 12, 2026

महादेवी वर्मा: जीवन परिचय एवं योगदान

June 11, 2026

मुंशी प्रेमचंद: जीवन परिचय, प्रमुख कृतियाँ

May 12, 2026
  • Contact us
  • Disclaimer
  • Terms of Service
  • Privacy Policy
: whatsapp us on +918057391081 E-mail: setupragya@gmail.com
No Result
View All Result
  • Quiz
  • Static Gk
  • Polity
  • Hindi
  • Geography
  • Economics
  • General Science
  • Uttarakhand
  • History
  • Environment
  • Computer
  • Contact us

© 2024 GyanPragya - ArchnaChaudhary.