परिचय: वैद्युत संयोजी या आयनिक बंध
वैद्युत संयोजी बंध (Electrovalent Bond), जिसे आयनिक बंध (Ionic Bond) भी कहा जाता है, एक प्रकार का रासायनिक बंध है जो एक परमाणु से दूसरे परमाणु में एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (complete transfer) के कारण बनता है। यह बंध आमतौर पर एक धातु (metal) और एक अधातु (non-metal) के बीच बनता है।
आयनिक बंध का निर्माण
आयनिक बंध का निर्माण तब होता है जब एक परमाणु (आमतौर पर धातु) अपना बाह्यतम इलेक्ट्रॉन खोकर एक धनावेशित आयन (धनायन या cation) बनाता है, और दूसरा परमाणु (आमतौर पर अधातु) उस इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करके एक ऋणावेशित आयन (ऋणायन या anion) बनाता है। इन विपरीत आवेशित आयनों के बीच लगने वाला स्थिरविद्युत आकर्षण बल (electrostatic force of attraction) ही आयनिक बंध कहलाता है।
उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl) का बनना
- सोडियम (Na): इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। यह अपना एक बाह्यतम इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ आयन (विन्यास 2, 8) बनाता है और स्थायित्व प्राप्त करता है।
- क्लोरीन (Cl): इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। इसे अपना अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। यह सोडियम द्वारा त्यागे गए इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करके Cl⁻ आयन (विन्यास 2, 8, 8) बनाता है।
- Na⁺ और Cl⁻ आयनों के बीच प्रबल स्थिरविद्युत आकर्षण बल उन्हें एक साथ बांधता है, जिससे सोडियम क्लोराइड (NaCl) यौगिक बनता है।
वैद्युत संयोजी यौगिकों के गुण
- भौतिक अवस्था: ये यौगिक आमतौर पर कठोर, क्रिस्टलीय ठोस होते हैं क्योंकि आयनों के बीच प्रबल आकर्षण बल होता है।
- गलनांक और क्वथनांक: आयनों के बीच प्रबल स्थिरविद्युत आकर्षण बल को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
- विलेयता (Solubility): ये सामान्यतः ध्रुवीय विलायकों (polar solvents) जैसे पानी में विलेय होते हैं, लेकिन अध्रुवीय विलायकों (non-polar solvents) जैसे बेंजीन या केरोसिन में अविलेय होते हैं।
- विद्युत चालकता: ठोस अवस्था में, आयन गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते, इसलिए ये विद्युत के कुचालक होते हैं। हालांकि, गलित अवस्था में या जलीय विलयन में, आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं, इसलिए वे विद्युत के सुचालक बन जाते हैं।
- भंगुरता (Brittleness): ये यौगिक भंगुर होते हैं। बल लगाने पर, आयनों की परतें खिसक जाती हैं और समान आवेश वाले आयन एक-दूसरे के सामने आ जाते हैं, जिससे प्रतिकर्षण होता है और क्रिस्टल टूट जाता है।