परिचय: हुंड का नियम
हुंड का अधिकतम बहुलता का नियम (Hund’s Rule of Maximum Multiplicity) परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को निर्धारित करने वाले तीन महत्वपूर्ण नियमों में से एक है, अन्य दो आफबाऊ सिद्धांत और पाउली का अपवर्जन सिद्धांत हैं। 1925 में जर्मन भौतिक विज्ञानी फ्रेडरिक हुंड द्वारा दिया गया यह नियम बताता है कि समान ऊर्जा वाले कक्षकों (degenerate orbitals) में इलेक्ट्रॉन कैसे भरते हैं।
नियम का कथन
इस नियम के अनुसार, “किसी भी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (pairing) तब तक नहीं होता, जब तक कि उस उपकोश के सभी कक्षकों में एक-एक इलेक्ट्रॉन नहीं भर जाता।”
इसका एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अकेले भरे जाने वाले सभी इलेक्ट्रॉनों का प्रचक्रण (spin) समानांतर (parallel) होता है, यानी वे सभी एक ही दिशा में होते हैं (आमतौर पर पहले ऊपर की ओर स्पिन, +½)।
नियम की व्याख्या और अनुप्रयोग
हुंड का नियम इस तथ्य पर आधारित है कि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं और एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। एक ही कक्षक में दो इलेक्ट्रॉनों को रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है ताकि वे प्रतिकर्षण बल को पार कर सकें। इसलिए, इलेक्ट्रॉन पहले अलग-अलग कक्षकों में रहना पसंद करते हैं ताकि प्रतिकर्षण न्यूनतम हो और निकाय की ऊर्जा कम हो, जिससे स्थायित्व बढ़ता है।
उदाहरण: नाइट्रोजन (N, Z=7) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
नाइट्रोजन का विन्यास 1s² 2s² 2p³ है। हुंड के नियम के अनुसार, 2p उपकोश में तीन इलेक्ट्रॉन कैसे भरेंगे:
- सही तरीका: p उपकोश में तीन कक्षक (pₓ, pᵧ, p₂) होते हैं। पहला इलेक्ट्रॉन pₓ में जाएगा, दूसरा pᵧ में, और तीसरा p₂ में। तीनों का स्पिन समानांतर होगा। (↑ ↑ ↑)
- गलत तरीका: पहले दो इलेक्ट्रॉनों को pₓ में युग्मित करना और फिर तीसरे को pᵧ में रखना। (↑↓ ↑ _)
उदाहरण: ऑक्सीजन (O, Z=8) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
ऑक्सीजन का विन्यास 1s² 2s² 2p⁴ है। 2p उपकोश में चार इलेक्ट्रॉन कैसे भरेंगे:
- पहले तीन इलेक्ट्रॉन pₓ, pᵧ, और p₂ में एक-एक करके समानांतर स्पिन के साथ भरेंगे।
- चौथा इलेक्ट्रॉन अब पहले कक्षक (pₓ) में विपरीत स्पिन के साथ युग्मित होगा। (↑↓ ↑ ↑)