परिचय: केप्लर के ग्रहीय गति के नियम
17वीं शताब्दी की शुरुआत में, जर्मन खगोलशास्त्री जोहान्स केप्लर ने ग्रहों की गति का वर्णन करने के लिए तीन नियमों का प्रतिपादन किया। ये नियम टाइको ब्राहे द्वारा एकत्र किए गए सटीक खगोलीय आँकड़ों पर आधारित थे।
केप्लर का प्रथम नियम: कक्षाओं का नियम (Law of Orbits)
कथन: “प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्ताकार (elliptical) कक्षा में परिक्रमा करता है, तथा सूर्य इस दीर्घवृत्त के किसी एक फोकस (focus) पर स्थित होता है।”
- यह नियम इस आम धारणा को खारिज करता है कि ग्रह वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं।
- इसके कारण, ग्रह की सूर्य से दूरी परिक्रमा के दौरान बदलती रहती है।
केप्लर का द्वितीय नियम: क्षेत्रफलों का नियम (Law of Areas)
कथन: “किसी भी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय अंतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है।”
- इसका अर्थ है कि ग्रह की क्षेत्रीय चाल (areal velocity) नियत रहती है।
- इस नियम का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि जब ग्रह सूर्य के निकट होता है, तो उसकी चाल अधिक होती है, और जब वह सूर्य से दूर होता है, तो उसकी चाल कम होती है।
- यह नियम कोणीय संवेग संरक्षण (conservation of angular momentum) के नियम पर आधारित है।
केप्लर का तृतीय नियम: आवर्तकालों का नियम (Law of Periods)
कथन: “सूर्य के चारों ओर किसी भी ग्रह के परिक्रमण काल (Time Period, T) का वर्ग, उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष (semi-major axis, r) के घन के समानुपाती होता है।”
सूत्र और व्युत्पत्ति (वृत्ताकार कक्षा के लिए)
सूत्र: T² ∝ r³ या T²/r³ = नियतांक (Constant)
व्युत्पत्ति:
मान लीजिए M द्रव्यमान का सूर्य है और m द्रव्यमान का ग्रह r त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में v वेग से परिक्रमा कर रहा है।
आवश्यक अभिकेंद्रीय बल (Fₙ) सूर्य द्वारा लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बल (F₉) से प्राप्त होता है।
Fₙ = F₉
mv²/r = GMm/r²
v² = GM/r
चूंकि परिक्रमण काल T = (कक्षा की परिधि) / वेग = 2πr / v, तो v = 2πr / T.
(2πr / T)² = GM/r
4π²r²/T² = GM/r
T² = (4π²/GM) * r³
चूंकि (4π²/GM) एक नियतांक है, अतः T² ∝ r³।
संख्यात्मक उदाहरण
उदाहरण
प्रश्न: यदि पृथ्वी की सूर्य से औसत दूरी ‘r’ हो और उसका परिक्रमण काल ‘T’ हो, तो एक अन्य ग्रह का परिक्रमण काल क्या होगा जिसकी सूर्य से औसत दूरी ‘4r’ है?
हल:
केप्लर के तीसरे नियम से, T² ∝ r³
(T₂/T₁)² = (r₂/r₁)²
दिया है: r₁ = r, T₁ = T, r₂ = 4r
(T₂/T)² = (4r/r)³ = 4³ = 64
T₂² = 64T²
T₂ = √64T²
T₂ = 8T
अतः, उस ग्रह का परिक्रमण काल पृथ्वी के परिक्रमण काल का 8 गुना होगा।
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