परिचय: जंतुओं में पोषण
पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव भोजन ग्रहण करते हैं और उसका उपयोग ऊर्जा, वृद्धि और शरीर की मरम्मत के लिए करते हैं। जंतु अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, इसलिए वे विषमपोषी (Heterotrophs) होते हैं और पोषण के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
प्राणिसमभोजी पोषण के चरण (Steps of Holozoic Nutrition)
अधिकांश जंतुओं में प्राणिसमभोजी पोषण होता है, जिसमें जटिल भोजन को ग्रहण कर शरीर के अंदर पचाया जाता है। इसके 5 मुख्य चरण हैं:
- 1. अंतर्ग्रहण (Ingestion): भोजन को शरीर के अंदर लेने की प्रक्रिया।
- 2. पाचन (Digestion): जटिल और अघुलनशील खाद्य पदार्थों को एंजाइमों की मदद से सरल और घुलनशील पदार्थों में तोड़ने की प्रक्रिया।
- 3. अवशोषण (Absorption): पचे हुए भोजन का आंत की दीवारों द्वारा सोखकर रक्त में मिलने की प्रक्रिया।
- 4. स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषित भोजन का शरीर की कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा उत्पादन, वृद्धि और मरम्मत के लिए उपयोग किया जाना।
- 5. बहिःक्षेपण (Egestion): अपचित भोजन को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया।
पोषण के विभिन्न प्रकार
1. प्राणिसमभोजी (Holozoic)
जटिल कार्बनिक पदार्थों को ठोस रूप में ग्रहण करना। इसे भोजन की प्रकृति के आधार पर आगे बांटा गया है:
- शाकाहारी (Herbivores): केवल पौधे खाते हैं। (उदा. गाय, हिरण)
- मांसाहारी (Carnivores): अन्य जंतुओं को खाते हैं। (उदा. शेर, बाघ)
- सर्वाहारी (Omnivores): पौधे और जंतु दोनों खाते हैं। (उदा. मनुष्य, भालू)
2. परजीवी (Parasitic)
अन्य जीवित जीवों (पोषी) से अपना भोजन प्राप्त करना। उदाहरण: फीताकृमि, जूँ।
3. मृतोपजीवी (Saprozoic)
मृत और सड़े-गले जैविक पदार्थों से भोजन प्राप्त करना। यह जंतुओं में दुर्लभ है। उदाहरण: कुछ प्रोटोजोआ।
मानव में पोषण: पाचन तंत्र
मनुष्य में एक सुविकसित पाचन तंत्र होता है जो भोजन को पचाने का कार्य करता है। इसमें आहार नाल और संबंधित ग्रंथियां शामिल हैं।
आहार नाल (Alimentary Canal)
- मुख (Mouth): यहाँ भोजन का अंतर्ग्रहण होता है। लार में मौजूद एमाइलेज (टायलिन) एंजाइम स्टार्च का पाचन शुरू करता है।
- आमाशय (Stomach): यहाँ प्रोटीन का पाचन पेप्सिन एंजाइम द्वारा शुरू होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) भोजन को अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।
- छोटी आंत (Small Intestine): यह पाचन और अवशोषण का मुख्य स्थल है। यहाँ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पूर्ण पाचन होता है।
- बड़ी आंत (Large Intestine): यहाँ जल और कुछ लवणों का अवशोषण होता है।
पाचक ग्रंथियां (Digestive Glands)
- यकृत (Liver): यह पित्त रस (Bile Juice) का निर्माण करता है, जो वसा के पायसीकरण (emulsification) में मदद करता है।
- अग्न्याशय (Pancreas): यह अग्न्याशयिक रस का स्राव करता है जिसमें ट्रिप्सिन, लाइपेज और एमाइलेज जैसे एंजाइम होते हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| पाचन का मुख्य स्थल | छोटी आंत (Small Intestine) |
| प्रोटीन का पाचन | आमाशय में शुरू होता है (पेप्सिन द्वारा) |
| स्टार्च का पाचन | मुख में शुरू होता है (लार एमाइलेज द्वारा) |
| सबसे बड़ी ग्रंथि | यकृत (Liver) |
| वसा का पायसीकरण | पित्त रस (Bile Juice) द्वारा किया जाता है |