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पीएन जंक्शन (PN Junction)

परिचय: पी-एन संधि (PN Junction)

पी-एन संधि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार है। यह तब बनती है जब एक P-प्रकार के अर्धचालक को एक N-प्रकार के अर्धचालक के साथ एक विशेष विधि द्वारा जोड़ा जाता है। यह संधि डायोड, ट्रांजिस्टर और अन्य अर्धचालक उपकरणों का मूल निर्माण खंड है।

पी-एन संधि का निर्माण

जब P-प्रकार और N-प्रकार के अर्धचालकों को संपर्क में लाया जाता है, तो दो प्रक्रियाएं होती हैं:

  • विसरण (Diffusion): सांद्रता में अंतर के कारण, P-क्षेत्र से होल (बहुसंख्यक वाहक) N-क्षेत्र की ओर और N-क्षेत्र से इलेक्ट्रॉन (बहुसंख्यक वाहक) P-क्षेत्र की ओर विसरित होने लगते हैं।
  • पुनर्संयोजन (Recombination): जब इलेक्ट्रॉन और होल संधि को पार करते हैं, तो वे एक-दूसरे के साथ मिलकर उदासीन हो जाते हैं।

अवक्षय परत और विभव प्राचीर

इस विसरण और पुनर्संयोजन के कारण, संधि के दोनों ओर एक ऐसा क्षेत्र बन जाता है जिसमें कोई गतिशील आवेश वाहक (न इलेक्ट्रॉन, न होल) नहीं होते हैं। इस क्षेत्र को अवक्षय परत (Depletion Region) कहते हैं।

इस परत में, N-क्षेत्र की ओर धनात्मक दाता आयन और P-क्षेत्र की ओर ऋणात्मक ग्राही आयन की एक परत बन जाती है। यह आयन परत एक आंतरिक विद्युत क्षेत्र (Eᵢ) उत्पन्न करती है, जो N-क्षेत्र से P-क्षेत्र की ओर निर्देशित होता है। यह विद्युत क्षेत्र आवेश वाहकों के और अधिक विसरण को रोकता है। इस विद्युत क्षेत्र के कारण उत्पन्न विभवांतर को विभव प्राचीर (Potential Barrier) कहते हैं।

पी-एन संधि की अभिनति (Biasing)

1. अग्र अभिनति (Forward Biasing)

जब P-क्षेत्र को बैटरी के धनात्मक सिरे से और N-क्षेत्र को ऋणात्मक सिरे से जोड़ा जाता है, तो इसे अग्र अभिनति कहते हैं।

  • बाहरी वोल्टेज विभव प्राचीर का विरोध करता है, जिससे विभव प्राचीर और अवक्षय परत की चौड़ाई कम हो जाती है।
  • बहुसंख्यक आवेश वाहक (होल और इलेक्ट्रॉन) आसानी से संधि को पार कर जाते हैं, जिससे एक बड़ी अग्र धारा (forward current) प्रवाहित होती है।

2. पश्च अभिनति (Reverse Biasing)

जब P-क्षेत्र को बैटरी के ऋणात्मक सिरे से और N-क्षेत्र को धनात्मक सिरे से जोड़ा जाता है, तो इसे पश्च अभिनति कहते हैं।

  • बाहरी वोल्टेज विभव प्राचीर का समर्थन करता है, जिससे विभव प्राचीर और अवक्षय परत की चौड़ाई बढ़ जाती है।
  • बहुसंख्यक आवेश वाहक संधि को पार नहीं कर पाते हैं।
  • केवल अल्पसंख्यक आवेश वाहकों के कारण एक बहुत छोटी (μA या nA) उत्क्रम धारा (reverse current) प्रवाहित होती है।

संख्यात्मक उदाहरण

उदाहरण 1

प्रश्न: एक पी-एन संधि डायोड में अवक्षय परत की मोटाई 0.5 μm है और विभव प्राचीर 0.7 V है। प्राचीर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की गणना करें।

हल:
दिया है:
मोटाई (d) = 0.5 μm = 0.5 × 10⁻⁶ m
विभव प्राचीर (V) = 0.7 V

विद्युत क्षेत्र (E) का सूत्र: E = V / d
E = 0.7 V / (0.5 × 10⁻⁶ m)
E = 1.4 × 10⁶ V/m

उदाहरण 2

प्रश्न: एक पी-एन संधि डायोड को पहले अग्र अभिनति में और फिर पश्च अभिनति में जोड़ा जाता है। दोनों स्थितियों में अवक्षय परत की चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

हल:
1. अग्र अभिनति (Forward Bias): बाहरी वोल्टेज आंतरिक विभव प्राचीर का विरोध करता है। इसके परिणामस्वरूप, अवक्षय परत की चौड़ाई घट जाती है।

2. पश्च अभिनति (Reverse Bias): बाहरी वोल्टेज आंतरिक विभव प्राचीर का समर्थन करता है। इसके परिणामस्वरूप, अवक्षय परत की चौड़ाई बढ़ जाती है।

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