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बहुलीकरण उत्पाद (Polymer Products)

बहुलक उत्पादों का वर्गीकरण

बहुलक (Polymers) हमारे चारों ओर हैं, जो विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्माण करते हैं। इन उत्पादों को उनके आणविक संरचना और गर्म करने पर उनके व्यवहार के आधार पर मुख्य रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है।

1. थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastics)

ये वे बहुलक हैं जो गर्म करने पर मुलायम हो जाते हैं और ठंडा करने पर कठोर हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जा सकता है, जिससे इन्हें आसानी से रिसाइकिल किया जा सकता है। इनकी श्रृंखलाओं के बीच कमजोर आकर्षण बल होते हैं।

  • उदाहरण: पॉलीथीन, पॉलीप्रोपीलीन, PVC, पॉलिस्टाइरीन, नायलॉन।

2. थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting Plastics)

ये वे बहुलक हैं जिन्हें निर्माण के दौरान गर्म करने पर वे स्थायी रूप से कठोर हो जाते हैं। इन्हें दोबारा गर्म करके मुलायम नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी श्रृंखलाओं के बीच मजबूत क्रॉस-लिंक (cross-links) बन जाते हैं।

  • उदाहरण: बैकेलाइट, मेलामाइन-फॉर्मेल्डिहाइड, यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड।

3. रेशे (Fibres)

ये धागे बनाने वाले ठोस होते हैं जिनकी तन्य शक्ति (tensile strength) बहुत अधिक होती है। इनके अणुओं के बीच मजबूत अंतर-आणविक बल होते हैं, जैसे हाइड्रोजन बॉन्डिंग।

  • उदाहरण: नायलॉन, पॉलिएस्टर (टेरिलीन), एक्रिलन।

4. इलास्टोमर (Elastomers)

इन बहुलकों में रबर जैसे गुण होते हैं। इनकी बहुलक श्रृंखलाएं कमजोर अंतर-आणविक बलों द्वारा जुड़ी होती हैं, जिससे इन्हें खींचा जा सकता है और बल हटाने पर ये अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाते हैं।

  • उदाहरण: प्राकृतिक रबर, ब्यूना-S, ब्यूना-N, नियोप्रीन।

कुछ महत्वपूर्ण बहुलक उत्पाद

पॉलीथीन (Polyethylene)

  • एकलक: एथीन
  • प्रकार और उपयोग:
    • LDPE (Low-Density Polyethylene): कम घनत्व, लचीला। उपयोग: पैकिंग फिल्में, थैलियाँ, बिजली के तारों का इन्सुलेशन।
    • HDPE (High-Density Polyethylene): उच्च घनत्व, कठोर और मजबूत। उपयोग: बाल्टियाँ, डस्टबिन, बोतलें, पाइप।

पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC)

  • एकलक: विनाइल क्लोराइड
  • गुण: कठोर और मजबूत।
  • उपयोग: पानी के पाइप, जूते-चप्पल, हैंडबैग, फर्श कवरिंग, बिजली के तार।

नायलॉन (Nylon)

  • प्रकार: यह एक पॉलीएमाइड है।
  • उदाहरण: नायलॉन-6,6 (हेक्सामेथिलीन डाइअमीन + एडिपिक एसिड) और नायलॉन-6 (कैप्रोलैक्टम)।
  • उपयोग: कपड़े, कालीन, रस्सी, टूथब्रश के ब्रिसल्स, टायर कॉर्ड।

बैकेलाइट (Bakelite)

  • एकलक: फिनोल + फॉर्मेल्डिहाइड
  • गुण: कठोर, भंगुर, ऊष्मा और विद्युत का कुचालक। यह एक थर्मोसेटिंग प्लास्टिक है।
  • उपयोग: बिजली के स्विच, प्लग, बर्तनों के हैंडल, कंघे।

अभ्यास प्रश्न (MCQs)

1. निम्नलिखित में से कौन सा थर्मोप्लास्टिक का उदाहरण नहीं है?
  • (a) पॉलीथीन
  • (b) PVC
  • (c) बैकेलाइट
  • (d) पॉलिस्टाइरीन
2. बिजली के स्विच बनाने के लिए बैकेलाइट का उपयोग क्यों किया जाता है?
  • (a) क्योंकि यह एक अच्छा सुचालक है।
  • (b) क्योंकि यह बहुत लचीला होता है।
  • (c) क्योंकि यह ऊष्मा और विद्युत का कुचालक है।
  • (d) क्योंकि इसे रिसाइकिल किया जा सकता है।
3. नायलॉन किस प्रकार का बहुलक है?
  • (a) पॉलीएस्टर
  • (b) पॉलीएमाइड
  • (c) पॉलीविनाइल
  • (d) पॉलीओलिफिन
4. LDPE और HDPE के बीच मुख्य अंतर क्या है?
  • (a) उनके एकलक अलग-अलग होते हैं।
  • (b) उनकी बहुलक श्रृंखलाओं की संरचना और घनत्व में अंतर होता है।
  • (c) LDPE थर्मोसेटिंग है जबकि HDPE थर्मोप्लास्टिक है।
  • (d) LDPE का उपयोग कठोर वस्तुओं के लिए होता है जबकि HDPE का लचीली वस्तुओं के लिए।
5. ‘ऑर्लोन’ (Orlon) या ‘एक्रिलन’ (Acrilan) किस एकलक का बहुलक है और इसका उपयोग किस रूप में होता है?
  • (a) विनाइल साइनाइड; कृत्रिम रबर
  • (b) एक्रिलोनाइट्राइल; ऊन के विकल्प के रूप में
  • (c) स्टाइरीन; पैकिंग सामग्री
  • (d) आइसोप्रीन; टायर बनाने में
6. मेलामाइन-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन का उपयोग क्रॉकरी (बर्तन) बनाने में क्यों किया जाता है?
  • (a) क्योंकि यह पारदर्शी होता है।
  • (b) क्योंकि यह बहुत सस्ता होता है।
  • (c) क्योंकि यह अटूट होता है और ऊष्मा का प्रतिरोधी है।
  • (d) क्योंकि यह नरम और लचीला होता है।
7. ‘ग्लािप्टल’ (Glyptal) नामक बहुलक किन एकलकों से बनता है और इसका मुख्य उपयोग क्या है?
  • (a) फिनोल और फॉर्मेल्डिहाइड; स्विच बनाने में
  • (b) यूरिया और फॉर्मेल्डिहाइड; अटूट बर्तन बनाने में
  • (c) एथिलीन ग्लाइकॉल और थैलिक एसिड; पेंट और लैकर बनाने में
  • (d) हेक्सामेथिलीन डाइअमीन और एडिपिक एसिड; रेशे बनाने में
8. ब्यूना-S एक सिंथेटिक रबर है। इसमें ‘Bu’ का अर्थ ब्यूटाडाईन है, ‘Na’ का अर्थ सोडियम है, तो ‘S’ का क्या अर्थ है?
  • (a) सल्फर
  • (b) स्टाइरीन
  • (c) सिलिकॉन
  • (d) सक्सिनिक एसिड
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