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भर्जन (Roasting)

भर्जन (Roasting) क्या है?

भर्जन (Roasting) धातुकर्म में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें सांद्रित अयस्क को उसके गलनांक से कम तापमान पर वायु की अधिकता (excess of air) में गर्म किया जाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों (Sulphide ores) के लिए उपयोग की जाती है, ताकि उन्हें धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जा सके। धातु ऑक्साइड से धातु का अपचयन करना सल्फाइड की तुलना में आसान होता है।

Diagram illustrating the roasting process of sulfide ore

भर्जन के मुख्य उद्देश्य

  • ऑक्सीकरण: इसका प्राथमिक उद्देश्य सल्फाइड अयस्क को उसके संगत धातु ऑक्साइड में बदलना है।
    उदाहरण: 2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2
  • वाष्पशील अशुद्धियों को हटाना: अयस्क में मौजूद वाष्पशील अशुद्धियाँ जैसे सल्फर (S), आर्सेनिक (As), और एंटीमनी (Sb) गर्म करने पर अपने वाष्पशील ऑक्साइड बनाकर उड़ जाती हैं।
    S + O2 → SO2(g)
    4As + 3O2 → 2As2O3(g)
  • अयस्क को सरंध्र (Porous) बनाना: इस प्रक्रिया से अयस्क सरंध्र हो जाता है, जिससे बाद में अपचयन की प्रक्रिया के लिए गैसों का आवागमन आसान हो जाता है।
  • नमी को हटाना: अयस्क में मौजूद किसी भी प्रकार की नमी गर्म करने से हट जाती है।

भर्जन और निस्तापन में अंतर

गुण भर्जन (Roasting) निस्तापन (Calcination)
वायु की आपूर्ति वायु की अधिकता में किया जाता है। वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में होता है।
अयस्क का प्रकार मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए। मुख्य रूप से कार्बोनेट और हाइड्रेटेड अयस्कों के लिए।
निकलने वाली गैस मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) निकलती है। मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) निकलती है।
उद्देश्य ऑक्सीकरण करना। नमी और वाष्पशील पदार्थों को हटाना, अपघटन करना।

अभ्यास प्रश्न (MCQs)

1. भर्जन प्रक्रिया मुख्य रूप से किस प्रकार के अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है?
  • (a) ऑक्साइड अयस्क
  • (b) कार्बोनेट अयस्क
  • (c) सल्फाइड अयस्क
  • (d) सिलिकेट अयस्क
2. भर्जन के दौरान, अयस्क में मौजूद आर्सेनिक की अशुद्धि किस रूप में हटाई जाती है?
  • (a) तात्विक आर्सेनिक वाष्प के रूप में
  • (b) वाष्पशील आर्सेनिक ऑक्साइड (As2O3) के रूप में
  • (c) आर्सेनिक सल्फाइड के रूप में
  • (d) यह हटाई नहीं जाती है
3. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया भर्जन का उदाहरण है?
  • (a) CaCO3 → CaO + CO2
  • (b) 2PbS + 3O2 → 2PbO + 2SO2
  • (c) Al2O3·2H2O → Al2O3 + 2H2O
  • (d) Fe2O3 + 3C → 2Fe + 3CO
4. भर्जन प्रक्रिया अयस्क को सरंध्र (porous) क्यों बनाती है?
  • (a) क्योंकि उच्च तापमान अयस्क को पिघला देता है।
  • (b) क्योंकि वायु के बुलबुले फंस जाते हैं।
  • (c) क्योंकि वाष्पशील अशुद्धियों के ऑक्साइड के रूप में निकलने से छिद्र बन जाते हैं।
  • (d) क्योंकि अयस्क पानी सोख लेता है।
5. सल्फाइड अयस्कों को सीधे कार्बन से अपचयित करने के बजाय ऑक्साइड में क्यों बदला जाता है?
  • (a) क्योंकि सल्फाइड अयस्क बहुत कठोर होते हैं।
  • (b) क्योंकि ऊष्मागतिकी के अनुसार, धातु ऑक्साइड का अपचयन सल्फाइड की तुलना में अधिक आसान होता है।
  • (c) क्योंकि सल्फाइड अयस्क जहरीले होते हैं।
  • (d) क्योंकि ऑक्साइड अयस्क बेहतर विद्युत चालक होते हैं।
6. भर्जन प्रक्रिया में तापमान को अयस्क के गलनांक से नीचे क्यों रखा जाता है?
  • (a) ऊर्जा बचाने के लिए।
  • (b) अयस्क को पिघलने से रोकने के लिए, ताकि वायु के साथ उचित संपर्क बना रहे।
  • (c) क्योंकि उच्च तापमान पर SO2 नहीं बनती है।
  • (d) यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, इसलिए तापमान नियंत्रित रहता है।
7. कॉपर के निष्कर्षण में, भर्जन के दौरान कॉपर पाइराइट (CuFeS2) का क्या होता है?
  • (a) यह सीधे धात्विक कॉपर में बदल जाता है।
  • (b) यह केवल कॉपर ऑक्साइड में बदलता है।
  • (c) यह आंशिक रूप से कॉपर सल्फाइड (Cu2S) और आयरन ऑक्साइड (FeO) में परिवर्तित होता है।
  • (d) इसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है।
8. भर्जन से निकलने वाली मुख्य गैस (SO2) का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक उपयोग क्या है?
  • (a) शीतल पेय बनाने में
  • (b) सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4) के निर्माण में
  • (c) रॉकेट ईंधन के रूप में
  • (d) वेल्डिंग में
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