1. परिचय: मरुस्थल क्या हैं?
मरुस्थल एक ऐसा भू-भाग है जहाँ अत्यधिक कम वर्षा होती है – आमतौर पर प्रति वर्ष 250 मिमी (10 इंच) से कम। यह धारणा गलत है कि सभी मरुस्थल गर्म और रेतीले होते हैं; कई मरुस्थल ठंडे, चट्टानी या बर्फीले भी हो सकते हैं। मरुस्थल पृथ्वी की लगभग एक-तिहाई भूमि सतह को कवर करते हैं और उनकी अनूठी जलवायु, वनस्पति और भू-आकृतियों की विशेषता होती है।
2. मरुस्थलों के निर्माण के कारण
मरुस्थलों का निर्माण मुख्य रूप से वैश्विक पवन पेटियों और स्थलाकृति के कारण होता है:
- उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटी (Sub-tropical High-Pressure Belts): लगभग 15° से 30° अक्षांशों के बीच, हवा ऊपर से नीचे उतरती है, जिससे वह गर्म और शुष्क हो जाती है। यह प्रक्रिया बादलों के निर्माण को रोकती है और वर्षा नहीं होने देती, जिससे दुनिया के अधिकांश महान गर्म मरुस्थल बनते हैं (जैसे सहारा)।
- वृष्टि छाया प्रभाव (Rain Shadow Effect): जब नम हवाएँ किसी पर्वत श्रृंखला से टकराती हैं, तो वे ऊपर उठती हैं और ठंडी होकर अपनी सारी नमी पर्वत के एक तरफ (पवनमुखी ढाल) बरसा देती हैं। पर्वत के दूसरी तरफ (पवनविमुखी ढाल) उतरती हुई हवा शुष्क होती है, जिससे वहाँ मरुस्थल का निर्माण होता है (जैसे पेटागोनिया मरुस्थल)।
- महाद्वीपीयता (Continentality): जो क्षेत्र समुद्र से बहुत दूर होते हैं, वहाँ तक पहुँचते-पहुँचते समुद्री हवाएँ अपनी नमी खो देती हैं, जिससे वे क्षेत्र शुष्क रह जाते हैं (जैसे गोबी मरुस्थल)।
- ठंडी महासागरीय धाराएँ (Cold Ocean Currents): महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर बहने वाली ठंडी धाराएँ अपने ऊपर की हवा को ठंडा कर देती हैं, जिससे उसकी नमी धारण करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे कोहरा तो बनता है, लेकिन वर्षा नहीं होती, जिससे तटीय मरुस्थल बनते हैं (जैसे अटाकामा मरुस्थल)।
3. मरुस्थलों का वर्गीकरण (Classification of Deserts)
A. गर्म मरुस्थल (Hot Deserts)
- स्थान: ये मुख्य रूप से उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- विशेषताएँ: वर्ष भर उच्च तापमान, अत्यधिक गर्म दिन और ठंडी रातें (उच्च दैनिक तापांतर), बहुत कम और अनियमित वर्षा।
- उदाहरण: सहारा (अफ्रीका), अरब मरुस्थल, थार (भारत/पाकिस्तान), कालाहारी (अफ्रीका), ग्रेट ऑस्ट्रेलियन मरुस्थल।
B. ठंडे मरुस्थल (Cold Deserts)
- स्थान: ये शीतोष्ण क्षेत्रों में, आमतौर पर महाद्वीपों के आंतरिक भागों में या ऊँचे पठारों पर स्थित होते हैं।
- विशेषताएँ: गर्मियाँ गर्म या हल्की गर्म, लेकिन सर्दियाँ अत्यधिक ठंडी और बर्फीली होती हैं। वर्षा कम होती है।
- उदाहरण: गोबी (चीन/मंगोलिया), पेटागोनिया (अर्जेंटीना), लद्दाख (भारत)।
C. तटीय मरुस्थल (Coastal Deserts)
- स्थान: ये महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर पाए जाते हैं।
- विशेषताएँ: इनका निर्माण ठंडी महासागरीय धाराओं के प्रभाव से होता है। यहाँ अक्सर घना कोहरा छाया रहता है, जो यहाँ की वनस्पति के लिए नमी का मुख्य स्रोत है, लेकिन वर्षा लगभग न के बराबर होती है।
- उदाहरण: अटाकामा (दक्षिण अमेरिका) – दुनिया का सबसे शुष्क मरुस्थल, नामीब (अफ्रीका)।
D. ध्रुवीय मरुस्थल (Polar Deserts)
- स्थान: ये आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- विशेषताएँ: ये दुनिया के सबसे बड़े मरुस्थल हैं। यहाँ अत्यधिक ठंड के कारण हवा में नमी बहुत कम होती है और जो भी वर्षण होता है, वह बर्फ के रूप में होता है।
- उदाहरण: अंटार्कटिक ध्रुवीय मरुस्थल, आर्कटिक ध्रुवीय मरुस्थल।
4. मरुस्थलीकरण: एक गंभीर चुनौती
मरुस्थलीकरण (Desertification) वह प्रक्रिया है जिसमें शुष्क, अर्ध-शुष्क और निर्जल उप-आर्द्र क्षेत्रों की भूमि मानवीय गतिविधियों (जैसे अत्यधिक चराई, वनों की कटाई) और जलवायु परिवर्तन के कारण अपनी जैविक उत्पादकता खो देती है। यह एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है जो खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन के लिए खतरा है।