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समुद्रों से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दे (Environmental Issues Related to Seas)

1. परिचय: संकट में सागर

सागर, जो पृथ्वी की जीवन समर्थन प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, वर्तमान में अभूतपूर्व पर्यावरणीय दबाव का सामना कर रहे हैं। मानवीय गतिविधियाँ इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों के संतुलन को बिगाड़ रही हैं, जिससे समुद्री जीवन, तटीय समुदायों और वैश्विक जलवायु के लिए गंभीर परिणाम हो रहे हैं। इन मुद्दों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, और संसाधनों का अति-दोहन।

2. प्रदूषण से संबंधित मुद्दे

[Image of plastic pollution in the sea]

A. प्लास्टिक और समुद्री मलबा

यह सागरों के लिए सबसे दृश्यमान और व्यापक खतरों में से एक है। भूमि-आधारित स्रोतों से निकलने वाला प्लास्टिक कचरा समुद्री धाराओं द्वारा एकत्रित होकर विशाल गारबेज पैच बनाता है। यह समुद्री जीवों के लिए घातक है जो इसे गलती से खा लेते हैं या इसमें फंस जाते हैं। समय के साथ, यह माइक्रोप्लास्टिक्स में टूट जाता है, जो खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर चुका है और संभावित रूप से मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।

B. पोषक तत्व प्रदूषण और सुपोषण

कृषि अपवाह और अनुपचारित सीवेज से निकलने वाले नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व तटीय सागरों में प्रवेश करते हैं। इससे सुपोषण (Eutrophication) होता है, जिससे हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन (Algal Blooms) होते हैं। जब ये शैवाल मरते हैं, तो उनके अपघटन की प्रक्रिया पानी में ऑक्सीजन को समाप्त कर देती है, जिससे “डेड ज़ोन” (Dead Zones) का निर्माण होता है जहाँ समुद्री जीवन जीवित नहीं रह सकता।

C. रासायनिक और तेल प्रदूषण

औद्योगिक निर्वहन, तेल रिसाव और कृषि कीटनाशक भारी धातुओं (जैसे पारा), PCBs, और अन्य विषाक्त पदार्थों को समुद्री वातावरण में छोड़ते हैं। ये प्रदूषक जैव आवर्धन (Biomagnification) के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में जमा हो जाते हैं, जो शीर्ष शिकारियों और मनुष्यों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं।

3. जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दे

A. महासागरीय अम्लीकरण

सागर वायुमंडल से अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को अवशोषित करते हैं, जिससे उनका pH स्तर गिर रहा है और वे अधिक अम्लीय हो रहे हैं। महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification) प्रवाल (coral), शंख (shellfish) और अन्य जीवों के लिए अपने कैल्शियम कार्बोनेट के कवच और कंकाल बनाना मुश्किल बना देता है, जिससे समुद्री पारिस्थितिक तंत्र का आधार ही खतरे में पड़ जाता है।

B. समुद्री तापमान में वृद्धि और प्रवाल विरंजन

बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण समुद्र का तापमान भी बढ़ रहा है। जब पानी बहुत गर्म हो जाता है, तो प्रवाल अपने सहजीवी शैवाल को बाहर निकाल देते हैं, जिससे वे सफेद हो जाते हैं – इस प्रक्रिया को प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) कहा जाता है। यदि यह लंबे समय तक बना रहता है, तो प्रवाल मर जाते हैं, जिससे दुनिया की सबसे विविध पारिस्थितिक तंत्रों में से एक नष्ट हो जाती है।

4. संसाधनों के अति-दोहन से संबंधित मुद्दे

  • अत्यधिक मछली पकड़ना (Overfishing): अस्थिर मछली पकड़ने की प्रथाओं ने दुनिया के कई प्रमुख मछली भंडारों को समाप्त या गंभीर रूप से कम कर दिया है। यह न केवल समुद्री खाद्य वेब को बाधित करता है, बल्कि उन लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका को भी खतरे में डालता है जो मछली पकड़ने पर निर्भर हैं।
  • तटीय पर्यावास का विनाश: मैंग्रोव वनों, समुद्री घास के मैदानों और आर्द्रभूमियों को तटीय विकास, जलीय कृषि और प्रदूषण के लिए तेजी से नष्ट किया जा रहा है। ये पर्यावास तटीय सुरक्षा, जल निस्पंदन और कई प्रजातियों के लिए नर्सरी के रूप में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवाएँ प्रदान करते हैं।
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