1. परिचय (Introduction)
लौह अयस्क (Iron Ore) एक धात्विक खनिज है और आधुनिक औद्योगिक विकास की रीढ़ (Backbone) है। यह इस्पात (Steel) के उत्पादन के लिए प्राथमिक कच्चा माल है, जिसका उपयोग मशीनरी से लेकर अवसंरचना तक हर चीज में होता है। भारत उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के विशाल भंडार से संपन्न है।
2. भारत में लौह अयस्क के प्रकार (Types of Iron Ore in India)
| अयस्क का प्रकार | लौह अंश | गुणवत्ता और विशेषताएँ |
|---|---|---|
| मैग्नेटाइट (Magnetite) | 70% से अधिक | यह सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला लौह अयस्क है जिसमें उत्कृष्ट चुंबकीय गुण होते हैं, जो इसे विद्युत उद्योग के लिए मूल्यवान बनाता है। |
| हेमाटाइट (Hematite) | 50% – 60% | यह सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है। भारत के अधिकांश भंडार इसी प्रकार के हैं। इसका रंग लाल होता है। |
| लिमोनाइट (Limonite) | 40% – 60% | यह पीले रंग का होता है और इसमें कई अशुद्धियाँ होती हैं। यह निम्न गुणवत्ता का अयस्क है। |
| सिडेराइट (Siderite) | 40% से कम | इसमें कई अशुद्धियाँ होती हैं और यह आर्थिक रूप से बहुत व्यवहार्य नहीं है। |
3. भारत की प्रमुख लौह अयस्क पेटियाँ (Major Iron Ore Belts in India)
- ओडिशा-झारखंड पेटी: यहाँ उच्च कोटि का हेमाटाइट अयस्क पाया जाता है। झारखंड की सिंहभूम और ओडिशा की मयूरभंज और केंदुझर की खदानें प्रसिद्ध हैं।
- दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पेटी: यह पेटी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में फैली हुई है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बैलाडिला की पहाड़ियाँ अपने सुपर-हाई-ग्रेड हेमाटाइट अयस्क के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे जापान और दक्षिण कोरिया को निर्यात किया जाता है।
- बल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमगलूर-तुमकुरु पेटी: यह पेटी कर्नाटक में स्थित है। कुद्रेमुख की खदानें 100% निर्यात इकाई थीं और दुनिया की सबसे बड़ी खदानों में से एक मानी जाती थीं।
- महाराष्ट्र-गोवा पेटी: इसमें गोवा और महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले की खदानें शामिल हैं। यहाँ का अयस्क बहुत उच्च गुणवत्ता का नहीं है, फिर भी इसका निर्यात किया जाता है।
4. प्रमुख उत्पादक राज्य (Major Producing States)
- ओडिशा (कुल उत्पादन का 50% से अधिक, सबसे बड़ा उत्पादक)
- छत्तीसगढ़
- कर्नाटक
- झारखंड
5. संबंधित संस्थान (Related Institutions)
- स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL): यह भारत की सबसे बड़ी सरकारी स्वामित्व वाली इस्पात उत्पादक कंपनी है।
- राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC): यह भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक और निर्यातक है, जो इस्पात मंत्रालय के अधीन है।
6. आर्थिक महत्व (Economic Importance)
- इस्पात उद्योग का आधार: यह लौह और इस्पात उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
- निर्यात: भारत उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क का एक प्रमुख निर्यातक है, विशेष रूप से जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों को, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
- रोजगार: खनन और संबंधित उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
7. खनन से संबंधित चुनौतियाँ (Challenges related to Mining)
- पर्यावरणीय चिंताएँ: खनन से वनों की कटाई, वायु और जल प्रदूषण तथा भूमि क्षरण होता है।
- विस्थापन: खनन परियोजनाएं अक्सर स्थानीय समुदायों, विशेषकर आदिवासियों को उनकी भूमि से विस्थापित करती हैं।
- अवैध खनन: यह एक बड़ी समस्या है जो राजस्व हानि और पर्यावरणीय क्षति का कारण बनती है।
8. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- लौह अयस्क औद्योगिक विकास की रीढ़ है।
- हेमाटाइट भारत का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है, जबकि मैग्नेटाइट सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला है।
- ओडिशा भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है।
- छत्तीसगढ़ में बैलाडिला और कर्नाटक में कुद्रेमुख की खदानें विश्व प्रसिद्ध हैं।
- भारत लौह अयस्क के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है।