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कुक्कुट पालन (Poultry)

1. परिचय (Introduction)

कुक्कुट पालन (Poultry Farming) का तात्पर्य अंडे और मांस के लिए घरेलू पक्षियों जैसे मुर्गी, टर्की, बत्तख और गिनी फाउल को पालने से है। भारत में, यह कृषि क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ते हुए खंडों में से एक है। यह पारंपरिक पिछवाड़े की खेती से एक उन्नत और व्यावसायिक उद्योग में परिवर्तित हो गया है।

2. भारतीय कुक्कुट उद्योग के खंड (Segments of Indian Poultry Industry)

भारतीय कुक्कुट उद्योग मुख्य रूप से दो खंडों में विभाजित है:

  • लेयर्स (Layers): ये मुर्गियाँ मुख्य रूप से अंडा उत्पादन के लिए पाली जाती हैं।
  • ब्रॉयलर (Broilers): ये पक्षी विशेष रूप से मांस उत्पादन के लिए पाले जाते हैं। वे बहुत तेजी से बढ़ते हैं और 6-7 सप्ताह में बाजार के लिए तैयार हो जाते हैं।

3. प्रमुख उत्पादक राज्य (Major Producing States)

उत्पादप्रमुख उत्पादक राज्य
अंडा उत्पादन (Egg Production)1. आंध्र प्रदेश (सबसे बड़ा उत्पादक)
2. तमिलनाडु
3. तेलंगाना
ब्रॉयलर मांस उत्पादन (Broiler Meat Production)1. महाराष्ट्र (सबसे बड़ा उत्पादक)
2. हरियाणा
3. पश्चिम बंगाल

कुल कुक्कुट जनसंख्या के मामले में तमिलनाडु देश में पहले स्थान पर है।

4. रजत क्रांति (Silver Revolution)

भारत में अंडा उत्पादन में हुई भारी वृद्धि को ‘रजत क्रांति’ (Silver Revolution) के नाम से जाना जाता है।

  • जनक: श्रीमती इंदिरा गांधी को ‘रजत क्रांति की जननी’ कहा जाता है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत नस्लों और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर देश में अंडे के उत्पादन को बढ़ावा देना था।

5. सरकारी पहल (Government Initiatives)

  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission): इस मिशन के तहत कुक्कुट पालन के विकास के लिए एक उप-मिशन है, जो छोटे किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF): यह कोष मांस प्रसंस्करण इकाइयों और पोल्ट्री फीड संयंत्रों की स्थापना में निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है।

6. आर्थिक महत्व (Economic Importance)

  • पोषण सुरक्षा: अंडे और चिकन प्रोटीन के सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले स्रोत हैं।
  • ग्रामीण रोजगार: यह क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर महिलाओं और भूमिहीन किसानों के लिए, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
  • तीव्र आय: ब्रॉयलर फार्मिंग कम समय में किसानों को आय प्रदान करती है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार होता है।
  • अन्य उपयोग: पोल्ट्री के अपशिष्ट (manure) का उपयोग एक उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में किया जाता है।

7. चुनौतियाँ (Challenges)

  • रोगों का प्रकोप: एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) और रानीखेत जैसी बीमारियाँ उद्योग के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
  • उच्च फ़ीड लागत: पोल्ट्री फ़ीड (मुख्य रूप से मक्का और सोयाबीन) उत्पादन लागत का 60-70% हिस्सा होता है, और इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव लाभप्रदता को प्रभावित करता है।
  • असंगठित क्षेत्र: पिछवाड़े की कुक्कुट पालन अभी भी काफी हद तक असंगठित है।

8. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)

  • भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक और पांचवां सबसे बड़ा ब्रॉयलर मांस उत्पादक है।
  • रजत क्रांति अंडा उत्पादन से संबंधित है।
  • आंध्र प्रदेश अंडे का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • महाराष्ट्र ब्रॉयलर मांस का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • लेयर्स अंडे के लिए और ब्रॉयलर मांस के लिए पाले जाते हैं।

9. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य (Other Important Facts)

  • केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (Central Avian Research Institute – CARI) इज्जतनगर, बरेली (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।
  • राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (National Egg Coordination Committee – NECC) भारत में अंडे की कीमतों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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