परिचय: कोसी – ‘बिहार का शोक’
कोसी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश करती है। यह नदी अपने साथ हिमालय से भारी मात्रा में गाद (Silt) लेकर आती है। मैदानी इलाकों में पहुँचने पर इसकी गति धीमी हो जाती है, जिससे यह गाद नदी के तल में जमा हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदी का तल उथला हो जाता है और यह अक्सर अपना मार्ग बदल लेती है, जिससे उत्तरी बिहार में विनाशकारी और अप्रत्याशित बाढ़ आती है। इसी अनिश्चित प्रकृति के कारण कोसी नदी को ‘बिहार का शोक’ (Sorrow of Bihar) कहा जाता है।
1. कोसी परियोजना: एक भारत-नेपाल संयुक्त उद्यम
कोसी नदी की बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए, भारत और नेपाल की सरकारों ने 1954 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत कोसी परियोजना की शुरुआत की गई। यह एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण है, लेकिन इसमें सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन भी शामिल है।
2. परियोजना के मुख्य उद्देश्य
इस परियोजना के निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य निर्धारित किए गए थे:
- बाढ़ नियंत्रण (Flood Control): यह परियोजना का सर्वोपरि उद्देश्य था ताकि उत्तरी बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्रों को विनाश से बचाया जा सके।
- सिंचाई (Irrigation): नहरों का एक नेटवर्क विकसित करके कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराना।
- जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power): नदी के प्रवाह का उपयोग करके बिजली का उत्पादन करना।
- भूमि सुधार (Land Reclamation): बाढ़ और दलदल से प्रभावित भूमि को कृषि योग्य बनाना।
- मत्स्य पालन और नौकायन (Fisheries and Navigation): इन गतिविधियों को बढ़ावा देना।
3. परियोजना के प्रमुख घटक
A. हनुमान नगर बैराज (Hanuman Nagar Barrage)
- स्थान: यह बैराज नेपाल में, भारतीय सीमा के पास हनुमान नगर में बनाया गया है।
- कार्य: इसका मुख्य कार्य कोसी नदी के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना और सिंचाई के लिए नहरों में पानी मोड़ना है।
B. तटबंध (Embankments)
- नदी को एक निश्चित मार्ग में रखने और बाढ़ के पानी को फैलने से रोकने के लिए बैराज के दोनों ओर (अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम) सैकड़ों किलोमीटर लंबे मिट्टी के तटबंध बनाए गए हैं।
C. नहर प्रणाली (Canal System)
बैराज से सिंचाई के लिए दो मुख्य नहरें निकाली गई हैं:
- पूर्वी कोसी नहर प्रणाली: यह बिहार के पूर्णिया, सहरसा और मधेपुरा जैसे जिलों को सिंचित करती है।
- पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली: यह बिहार के दरभंगा और मधुबनी जिलों के साथ-साथ नेपाल के कुछ क्षेत्रों को भी सिंचित करती है।
4. प्रभाव और चुनौतियाँ
A. सकारात्मक प्रभाव
- इस परियोजना ने उत्तरी बिहार में बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता को काफी हद तक कम कर दिया है।
- नहरों के माध्यम से सिंचाई ने क्षेत्र में कृषि उत्पादन, विशेषकर धान की खेती को बढ़ावा दिया है।
- जलविद्युत संयंत्र से बिजली का उत्पादन होता है जो नेपाल और भारत दोनों को आपूर्ति की जाती है।
B. चुनौतियाँ
परियोजना की सबसे बड़ी और निरंतर चुनौती अत्यधिक गाद (Heavy Siltation) है। कोसी नदी द्वारा लाए गए भारी मात्रा में गाद बैराज के पीछे और नदी के तल में जमा हो जाती है। इससे नदी का तल ऊपर उठता है, तटबंधों पर दबाव बढ़ता है और बाढ़ का खतरा फिर से बढ़ जाता है। 2008 में कुसहा में तटबंध का टूटना इसी समस्या का एक विनाशकारी परिणाम था। तटबंधों का नियमित रखरखाव और नदी की ड्रेजिंग एक बहुत बड़ी और महंगी चुनौती बनी हुई है।