1. परिचय: भारत का अपवाह तंत्र
भारत की नदी प्रणालियाँ देश की जीवन रेखा हैं, जो कृषि, पीने के पानी, बिजली उत्पादन और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) को उद्गम की प्रकृति के आधार पर मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: हिमालयी नदी प्रणाली और प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली। हिमालयी नदियाँ बारहमासी होती हैं क्योंकि उन्हें वर्षा के साथ-साथ ग्लेशियरों के पिघलने से भी जल प्राप्त होता है, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ अधिकतर वर्षा पर निर्भर होती हैं।
2. हिमालयी नदी प्रणाली
हिमालय से निकलने वाली नदियों को तीन प्रमुख प्रणालियों में बांटा गया है:
A. सिंधु नदी तंत्र (The Indus River System)
यह दुनिया के सबसे बड़े नदी बेसिन में से एक है।
- उद्गम: तिब्बत में कैलाश पर्वत श्रृंखला में बोखर चू (Bokhar Chu) ग्लेशियर के पास से। इसे तिब्बत में ‘सिंगी खंबन’ (Singi Khamban) या शेर का मुँह कहते हैं।
- प्रवाह: यह लद्दाख और बाल्टिस्तान से होकर बहती है और नंगा पर्वत के पास एक गहरे गॉर्ज का निर्माण करती है। भारत में यह केवल लद्दाख के लेह जिले से होकर बहती है।
- लंबाई: कुल लंबाई लगभग 2,880 किमी है, जिसमें से भारत में इसकी लंबाई 1,114 किमी है।
- सिंधु जल समझौता (1960): भारत और पाकिस्तान के बीच इस समझौते के तहत, भारत सिंधु और उसकी सहायक नदियों झेलम और चिनाब के कुल जल का 20% उपयोग कर सकता है।
सिंधु की प्रमुख सहायक नदियाँ (पंचनद)
| नदी | उद्गम | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| झेलम (वितस्ता) | पीर पंजाल में वेरीनाग झरना | यह श्रीनगर और वुलर झील से होकर बहती है। यह भारत-पाकिस्तान सीमा के साथ बहती है। |
| चिनाब (चंद्रभागा) | हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीति जिले में बारालाचा ला दर्रे के पास। | यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह चंद्रा और भागा दो नदियों के मिलने से बनती है। |
| रावी (इरावती) | हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के पास | यह पीर पंजाल और धौलाधार पर्वतमाला के बीच से होकर बहती है। |
| ब्यास (विपाशा) | हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के पास ब्यास कुंड से | यह पूरी तरह से भारत में बहने वाली सिंधु तंत्र की एकमात्र नदी है। यह सतलुज में मिलती है। |
| सतलुज (शतद्रु) | तिब्बत में मानसरोवर झील के पास राकस ताल से | इसे ‘लांगचेन खंबाब’ भी कहा जाता है। यह शिपकी ला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। भाखड़ा-नांगल परियोजना इसी नदी पर है। |
B. गंगा नदी तंत्र (The Ganga River System)
यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा नदी तंत्र है।
- उद्गम: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री ग्लेशियर के पास गोमुख से ‘भागीरथी’ के रूप में।
- गंगा का निर्माण: देवप्रयाग में जब भागीरथी और अलकनंदा नदियाँ मिलती हैं, तब इसे ‘गंगा’ कहा जाता है।
- प्रवाह: यह उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है। हरिद्वार में यह पहाड़ों से निकलकर मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है।
- लंबाई: लगभग 2,525 किमी।
- राष्ट्रीय नदी: गंगा को 2008 में भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया।
पंच प्रयाग (अलकनंदा से संगम)
- विष्णुप्रयाग: अलकनंदा + धौलीगंगा
- नंदप्रयाग: अलकनंदा + नंदाकिनी
- कर्णप्रयाग: अलकनंदा + पिंडार
- रुद्रप्रयाग: अलकनंदा + मंदाकिनी
- देवप्रयाग: अलकनंदा + भागीरथी = गंगा
गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ
- बाएँ तट की सहायक नदियाँ: रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, महानंदा।
- दाएँ तट की सहायक नदियाँ: यमुना, सोन, दामोदर।
- यमुना: यह गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है, जो यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है और प्रयागराज (इलाहाबाद) में गंगा से मिलती है। चंबल, सिंध, बेतवा, केन इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
- कोसी: इसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है क्योंकि यह अपना मार्ग बदलने और विनाशकारी बाढ़ लाने के लिए कुख्यात है।
- सुंदरबन डेल्टा: गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा, सुंदरबन बनाती हैं।
C. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (The Brahmaputra River System)
यह नदी आयतन (volume) की दृष्टि से भारत की सबसे बड़ी नदियों में से एक है।
- उद्गम: तिब्बत में कैलाश श्रेणी के चेमायुंगडुंग (Chemayungdung) ग्लेशियर से।
- विभिन्न नाम:
- तिब्बत में: सांगपो (Tsangpo), जिसका अर्थ है ‘शोधक’।
- अरुणाचल प्रदेश में: दिहांग या सियांग।
- असम में: ब्रह्मपुत्र।
- बांग्लादेश में: जमुना (गंगा से मिलने के बाद ‘पद्मा’ और फिर ‘मेघना’ कहलाती है)।
- भारत में प्रवेश: यह नामचा बरवा पर्वत के पास एक ‘U’ मोड़ लेकर अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है।
- माजुली द्वीप: असम में, यह नदी दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, माजुली बनाती है।
- प्रमुख सहायक नदियाँ: दिबांग, लोहित, सुबनसिरी, मानस, तीस्ता।
3. प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली
प्रायद्वीपीय नदियाँ हिमालयी नदियों से पुरानी हैं और इन्हें दो समूहों में बांटा गया है:
A. पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली)
ये नदियाँ आमतौर पर बड़े डेल्टा बनाती हैं।
- महानदी: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में सिहावा के पास से निकलती है। हीराकुंड बांध इसी नदी पर है।
- गोदावरी: महाराष्ट्र में नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर से निकलती है। यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी (1465 किमी) है और इसे ‘दक्षिण गंगा’ या ‘वृद्ध गंगा’ भी कहा जाता है।
- कृष्णा: महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के पास से निकलती है। तुंगभद्रा और भीमा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। नागार्जुन सागर बांध इसी पर है।
- कावेरी: कर्नाटक में ब्रह्मगिरि पहाड़ियों (तालकावेरी) से निकलती है। इसे ‘दक्षिण भारत की गंगा’ कहा जाता है। शिवसमुद्रम जलप्रपात इसी नदी पर है। यह दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व दोनों मानसून से वर्षा प्राप्त करती है, जिससे यह लगभग बारहमासी बनी रहती है।
B. पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ (अरब सागर में गिरने वाली)
ये नदियाँ डेल्टा के बजाय ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं क्योंकि वे कठोर चट्टानों से होकर बहती हैं और उनका ढलान तीव्र होता है।
- नर्मदा: मध्य प्रदेश में अमरकंटक पठार से निकलती है। यह विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) से होकर बहती है। जबलपुर के पास यह धुआँधार जलप्रपात बनाती है। सरदार सरोवर बांध इसी पर है।
- तापी (ताप्ती): मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में सतपुड़ा श्रेणी से निकलती है। यह नर्मदा के समानांतर एक भ्रंश घाटी में बहती है।
- माही: मध्य प्रदेश से निकलती है और यह कर्क रेखा को दो बार पार करने वाली भारत की एकमात्र नदी है।
- साबरमती: राजस्थान की अरावली पहाड़ियों से निकलती है और गुजरात से होकर बहती है।
4. हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की तुलना
| विशेषता | हिमालयी नदियाँ | प्रायद्वीपीय नदियाँ |
|---|---|---|
| उद्गम का स्रोत | हिमालय के ग्लेशियर | प्रायद्वीपीय पठार और मध्य उच्चभूमि |
| प्रवाह की प्रकृति | बारहमासी (Perennial) | मौसमी (वर्षा पर निर्भर) |
| अपवाह का प्रकार | पूर्ववर्ती (Antecedent) और अनुवर्ती | अध्यारोपित (Superimposed), पुनर्जीवित |
| नदी का मार्ग | लंबा मार्ग, गहरे गॉर्ज, मार्ग परिवर्तन | छोटा और निश्चित मार्ग |
| आयु | युवा और सक्रिय | पुरानी और प्रौढ़ |
| बेसिन का आकार | बहुत बड़ा बेसिन | अपेक्षाकृत छोटा बेसिन |
5. निष्कर्ष
भारत की नदी प्रणालियाँ न केवल भौगोलिक विशेषताएँ हैं, बल्कि वे देश की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और इतिहास की धुरी भी हैं। इन जीवनदायिनी नदियों का संरक्षण और सतत प्रबंधन भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) यमुनोत्री: यह यमुना नदी का उद्गम स्थल है। – (c) केदारनाथ: यह एक धार्मिक स्थल है, नदी का उद्गम नहीं। – (d) बद्रीनाथ: यह अलकनंदा नदी के पास स्थित है, लेकिन गंगा का उद्गम नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) तिस्ता: यह एक अलग नदी है जो पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में बहती है। – (b) संकोश: यह ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है। – (d) पद्मा: यह ब्रह्मपुत्र का बांग्लादेश में नाम है, भारत में नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (b) पश्चिम से पूर्व: यह अधिकांश भारतीय नदियों की दिशा है, जैसे गंगा, लेकिन नर्मदा इस दिशा में नहीं बहती। – (c) उत्तर से दक्षिण और (d) दक्षिण से उत्तर: ये गलत दिशा हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (b) दक्षिण यमुना: यह एक उपनाम नहीं है। – (c) कृष्णा नदी और (d) कावेरी नदी: ये अलग नदियाँ हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) गोदावरी, (b) नर्मदा, और (d) ब्रह्मपुत्र: ये मुख्य नदियाँ हैं, यमुना की सहायक नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) अरावली पर्वत: यह सही नहीं है क्योंकि यह पश्चिम भारत में स्थित है। – (c) पश्चिमी घाट और (d) विंध्याचल पर्वत: ये ताप्ती के स्रोत नहीं हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (b) मैसूर: कावेरी नदी इस शहर से होकर बहती है, लेकिन यह स्रोत नहीं है। – (c) ऊटी और (d) बेलगावी: ये कावेरी नदी के स्रोत से संबंधित नहीं हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) गंगा: यह चंबल की सहायक नहीं है। – (c) गोदावरी और (d) नर्मदा: ये चंबल से संबंधित नहीं हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) मानसरोवर झील: यह सिंधु नदी का उद्गम है। – (b) हिमालय: यह सामान्य क्षेत्र है, लेकिन तिब्बत विशेष रूप से सही है। – (d) अरुणाचल प्रदेश: यह भारत में नदी का प्रवेश बिंदु है, न कि उद्गम।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: – (a) वाराणसी: यह गंगा के तट पर स्थित है लेकिन संगम स्थल नहीं है। – (b) कानपुर और (d) पटना: ये अन्य स्थान हैं, जहाँ गंगा बहती है लेकिन संगम नहीं है।