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नदी बेसिन (River Basins)

1. परिचय: नदी बेसिन क्या है?

एक नदी बेसिन (River Basin) या जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) उस संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं जहाँ से वर्षा का जल या पिघलती बर्फ का पानी नदियों, धाराओं और नालों के माध्यम से बहकर एक मुख्य नदी में एकत्रित होता है और अंततः एक ही निकास बिंदु (जैसे समुद्र, झील या अन्य नदी) पर मिलता है। एक बेसिन को दूसरे से अलग करने वाली काल्पनिक रेखा को जल विभाजक (Watershed divide) कहा जाता है। नदी बेसिन देश के जल संसाधनों के प्रबंधन और योजना के लिए मौलिक इकाई हैं।

2. भारत में नदी बेसिनों का वर्गीकरण

भारत में नदी बेसिनों को उनके जलग्रहण क्षेत्र के आकार के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

श्रेणी जलग्रहण क्षेत्र (वर्ग किमी) संख्या उदाहरण
प्रमुख नदी बेसिन 20,000 से अधिक 12 गंगा, सिंधु, गोदावरी, कृष्णा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, नर्मदा, तापी, कावेरी, आदि।
मध्यम नदी बेसिन 2,000 से 20,000 के बीच 46 कालिंदी, पेरियार, मेघना, आदि।
छोटे (लघु) नदी बेसिन 2,000 से कम 55 तटीय क्षेत्रों में बहने वाली कई छोटी नदियाँ।

प्रमुख 12 नदी बेसिन भारत के कुल क्षेत्रफल का 75% और जल संसाधनों का 85% हिस्सा कवर करते हैं।

3. भारत के प्रमुख नदी बेसिन: एक विस्तृत अवलोकन

A. गंगा बेसिन

  • क्षेत्रफल: लगभग 8.6 लाख वर्ग किमी (भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन)।
  • शामिल राज्य: उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली।
  • महत्व: यह भारत का सबसे उपजाऊ और सघन आबादी वाला क्षेत्र है। देश की लगभग 40% आबादी इस बेसिन में निवास करती है। यह कृषि, उद्योग और पेयजल का प्रमुख स्रोत है।

B. सिंधु बेसिन

  • भारत में क्षेत्रफल: लगभग 3.21 लाख वर्ग किमी।
  • शामिल राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब।
  • महत्व: सिंधु जल संधि (1960) के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच इसके जल का बंटवारा होता है। यह क्षेत्र सिंचाई आधारित कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।

C. गोदावरी बेसिन

  • क्षेत्रफल: लगभग 3.12 लाख वर्ग किमी (प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा बेसिन)।
  • शामिल राज्य: महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक।
  • महत्व: इसे ‘दक्षिण गंगा’ भी कहा जाता है। यह बेसिन चावल, कपास और तंबाकू की खेती के लिए प्रसिद्ध है।

D. कृष्णा बेसिन

  • क्षेत्रफल: लगभग 2.58 लाख वर्ग किमी (प्रायद्वीपीय भारत का दूसरा सबसे बड़ा बेसिन)।
  • शामिल राज्य: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश।
  • महत्व: यह बेसिन भी कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ है और नागार्जुन सागर जैसी कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं का घर है।

E. ब्रह्मपुत्र बेसिन

  • भारत में क्षेत्रफल: लगभग 1.94 लाख वर्ग किमी।
  • शामिल राज्य: अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल।
  • महत्व: इस बेसिन में अत्यधिक वर्षा होती है, जिससे यह जल संसाधनों में बहुत समृद्ध है लेकिन बाढ़ की आशंका भी अधिक रहती है। इसमें जलविद्युत की अपार क्षमता है।

F. महानदी बेसिन

  • क्षेत्रफल: लगभग 1.41 लाख वर्ग किमी।
  • शामिल राज्य: छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश।
  • महत्व: हीराकुंड बांध इसी बेसिन में स्थित है, जो सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में मदद करता है। यह क्षेत्र खनिज संसाधनों से समृद्ध है।

G. नर्मदा और तापी बेसिन

  • क्षेत्रफल: नर्मदा (~0.98 लाख वर्ग किमी), तापी (~0.65 लाख वर्ग किमी)।
  • शामिल राज्य: मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र।
  • महत्व: ये प्रमुख पश्चिम-प्रवाह वाली नदियाँ हैं जो भ्रंश घाटियों से होकर बहती हैं। सरदार सरोवर (नर्मदा) और उकाई (तापी) जैसी परियोजनाएँ सिंचाई और बिजली के लिए महत्वपूर्ण हैं।

4. नदी बेसिन प्रबंधन

नदी बेसिनों का स्थायी प्रबंधन भारत की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। एक बेसिन के भीतर जल संसाधनों का एकीकृत प्रबंधन आवश्यक है क्योंकि एक स्थान पर की गई कार्रवाई का प्रभाव पूरे बेसिन पर पड़ता है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय जल मिशन और नदी बेसिन प्रबंधन विधेयक जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (IWRM) को बढ़ावा दिया है, जिसका उद्देश्य जल के कुशल उपयोग, संरक्षण और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।

5. निष्कर्ष

नदी बेसिन भारत की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक संरचना की नींव हैं। वे करोड़ों लोगों को जीवनयापन के साधन प्रदान करते हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या के दबाव के बीच, इन महत्वपूर्ण जल संसाधनों का वैज्ञानिक और सहकारी तरीके से प्रबंधन करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

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