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भूकंप के प्रकार (Types of Earthquakes)

1. परिचय (Introduction)

भूकंप विभिन्न कारणों से और पृथ्वी के भीतर अलग-अलग गहराइयों पर उत्पन्न होते हैं। इन अंतरों के आधार पर, भूकंपों को वर्गीकृत किया जा सकता है ताकि उनके स्रोत, क्रियाविधि और संभावित खतरों को बेहतर ढंग से समझा जा सके। वर्गीकरण के दो मुख्य आधार हैं: उत्पत्ति का कारण और उद्गम केंद्र की गहराई।

2. उत्पत्ति के कारण के आधार पर वर्गीकरण (Classification Based on Causative Factors)

A. विवर्तनिक भूकंप (Tectonic Earthquakes)

  • ये सबसे आम और सबसे विनाशकारी प्रकार के भूकंप हैं।
  • इनका कारण टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। जब प्लेटें खिसकती हैं, तो चट्टानों में तनाव जमा होता है और भ्रंश (Fault) के साथ अचानक ऊर्जा मुक्त होती है।
  • दुनिया के लगभग 80% भूकंप इसी प्रकार के होते हैं और मुख्य रूप से प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर में आते हैं।

B. ज्वालामुखीय भूकंप (Volcanic Earthquakes)

  • ये भूकंप सक्रिय ज्वालामुखियों तक ही सीमित होते हैं।
  • ये ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा की गति और विस्फोट के कारण होते हैं।
  • ये आमतौर पर विवर्तनिक भूकंपों की तुलना में कम शक्तिशाली होते हैं, लेकिन वे एक आसन्न ज्वालामुखी विस्फोट के प्रारंभिक चेतावनी संकेत के रूप में काम कर सकते हैं।

C. निपात भूकंप (Collapse Earthquakes)

  • ये भूमिगत खानों और गुफाओं के क्षेत्रों में होते हैं।
  • ये तब होते हैं जब खानों की छतें या गुफाएं ढह जाती हैं, जिससे पृथ्वी में हल्के झटके पैदा होते हैं।
  • ये बहुत छोटे और स्थानीयकृत होते हैं।

D. मानव-जनित भूकंप (Human-induced Earthquakes)

  • ये मानवीय गतिविधियों के कारण होते हैं जो पृथ्वी की भूपर्पटी में तनाव को बदल देते हैं।
  • जलाशय प्रेरित भूकंपीयता (Reservoir-induced Seismicity – RIS): बड़े बांधों के जलाशयों में पानी का भारी वजन नीचे की चट्टानों पर दबाव डालता है, जिससे भ्रंश सक्रिय हो सकते हैं। उदाहरण: 1967 में कोयना, महाराष्ट्र का भूकंप।
  • खनन-प्रेरित भूकंप: बड़े पैमाने पर खनन से भी स्थानीय स्तर पर भूकंप आ सकते हैं।

3. उद्गम केंद्र की गहराई के आधार पर वर्गीकरण (Classification Based on Depth of Focus)

उद्गम केंद्र (Focus) की गहराई भूकंप की विनाशकारी क्षमता को बहुत प्रभावित करती है।

A. उथले-केंद्र भूकंप (Shallow-focus Earthquakes)

  • गहराई: 0 से 70 किलोमीटर।
  • विशेषता: ये सबसे आम और सबसे विनाशकारी होते हैं, क्योंकि इनकी ऊर्जा सतह के करीब मुक्त होती है, जिससे धरातलीय तरंगें बहुत शक्तिशाली होती हैं।
  • स्थान: ये सभी प्रकार की प्लेट सीमाओं पर पाए जाते हैं।

B. मध्यवर्ती-केंद्र भूकंप (Intermediate-focus Earthquakes)

  • गहराई: 70 से 300 किलोमीटर।
  • विशेषता: ये उथले भूकंपों की तुलना में कम विनाशकारी होते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा सतह तक पहुँचने से पहले ही काफी हद तक समाप्त हो जाती है।
  • स्थान: ये लगभग विशेष रूप से अभिसारी प्लेट सीमाओं (प्रविष्ठन क्षेत्रों) पर होते हैं।

C. गहरे-केंद्र भूकंप (Deep-focus Earthquakes)

  • गहराई: 300 से 700 किलोमीटर।
  • विशेषता: ये सबसे कम विनाशकारी होते हैं क्योंकि इनकी ऊर्जा सतह तक पहुँचने पर बहुत कमजोर हो जाती है। हालांकि, ये बहुत बड़े क्षेत्र में महसूस किए जा सकते हैं।
  • स्थान: ये केवल प्रविष्ठन क्षेत्रों (Subduction Zones) में होते हैं, जहाँ नीचे जाने वाली प्लेट मेंटल में गहराई तक पहुँच जाती है। इन भूकंपों के क्षेत्र को बेनिऑफ ज़ोन (Benioff Zone) कहा जाता है।
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