परिभाषा
क्रिया हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कार्य, अवस्था, या घटना को व्यक्त करता है। क्रिया के विभिन्न प्रकार और उनके उपयोग के माध्यम से वाक्य को समझने और सही ढंग से प्रस्तुत करने में मदद मिलती है।
यहाँ, हम क्रिया के विभिन्न पहलुओं जैसे धातु, मूल क्रिया, यौगिक क्रिया, और विभिन्न आधारों पर क्रिया का वर्गीकरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
1. धातु
परिभाषा: धातु वह मूल रूप है जिससे क्रिया उत्पन्न होती है। यह क्रिया का सबसे बुनियादी रूप है, जिसका उपयोग क्रियाओं के निर्माण में किया जाता है।
उदाहरण: “खा” से “खाना”, “चल” से “चलना”।
2. मूल क्रिया
परिभाषा: मूल क्रिया वह होती है जो बिना किसी सहायक क्रिया के अपने आप में पूरी होती है और वाक्य का पूर्ण अर्थ बताती है।
उदाहरण: “राम पढ़ता है।” (यहाँ “पढ़ता” एक मूल क्रिया है)
“वह दौड़ता है।”
3. यौगिक क्रिया
परिभाषा: यौगिक क्रिया वह होती है जो दो या दो से अधिक क्रियाओं के संयोजन से बनती है। यह क्रिया किसी कार्य के विशेष स्वरूप को स्पष्ट करती है।
उदाहरण: “राम ने खाना खा लिया।” (खाना + लिया)
“वह चल पड़ा।” (चलना + पड़ना)
4. क्रिया का विभाजन
(i) कर्म के आधार पर क्रिया का विभाजन:
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सकर्मक क्रिया: यह क्रिया वह होती है जो अपने साथ कर्म को लेकर चलती है।
उदाहरण: “राम ने किताब पढ़ी।” (यहाँ “किताब” कर्म है) -
अकर्मक क्रिया: यह क्रिया वह होती है जो बिना कर्म के ही पूरी होती है।
उदाहरण: “बच्चा सो रहा है।” (इसमें कोई कर्म नहीं है)
(ii) अर्थ के आधार पर क्रिया का विभाजन:
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भाववाचक क्रिया: यह क्रिया व्यक्ति की अवस्था या स्थिति को व्यक्त करती है।
उदाहरण: “वह खुश है।” (यह अवस्था को व्यक्त करता है) -
प्रवृत्तिवाचक क्रिया: यह क्रिया किसी कार्य के होने को दर्शाती है।
उदाहरण: “वह दौड़ता है।” (यह कार्य को व्यक्त करता है) -
स्थितिवाचक क्रिया: यह क्रिया स्थायी स्थिति या अवस्था को व्यक्त करती है।
उदाहरण: “सूर्य उगता है।” (यह प्राकृतिक घटना की स्थिति को व्यक्त करता है)
5. क्रिया के अन्य प्रकार
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निजवाचक क्रिया: जब क्रिया का प्रभाव उसी पर पड़ता है जो कार्य कर रहा है।
उदाहरण: “मैं अपने बाल संवार रहा हूँ।” -
सहायक क्रिया: यह क्रिया मुख्य क्रिया के साथ मिलकर कार्य, समय या परिस्थिति को स्पष्ट करती है।
उदाहरण: “मैं पढ़ रहा हूँ।” (“रहा हूँ” सहायक क्रिया है) -
संभाव्य क्रिया: यह क्रिया की संभावना या इरादा प्रकट करती है।
उदाहरण: “मैं जा सकता हूँ।”
6. काल के आधार पर क्रिया
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वर्तमान काल: जो कार्य वर्तमान समय में हो रहा है।
उदाहरण: “वह खेलता है।” -
भूतकाल: जो कार्य पहले हो चुका है।
उदाहरण: “वह खेला।” -
भविष्यकाल: जो कार्य भविष्य में होगा।
उदाहरण: “वह खेलेगा।”
7. क्रिया के रूप
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कृदंत: ये क्रियाओं के विशेष रूप होते हैं जो विशेषण की तरह कार्य करते हैं।
उदाहरण: “हँसता हुआ बच्चा।” (“हँसता” कृदंत है) -
संभावनावाचक क्रिया: यह किसी स्थिति या शर्त के आधार पर क्रिया के होने या न होने को व्यक्त करती है।
उदाहरण: “यदि वह आता, तो मैं उसे देखता।”