परिभाषा
सर्वनाम वे शब्द होते हैं जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं। इनका उपयोग वाक्यों में संज्ञा की पुनरावृत्ति (बार-बार आने) को रोकने के लिए किया जाता है, जिससे वाक्य अधिक सहज और सुंदर बनते हैं।
उदाहरण: राम खेलता है। वह अच्छा खिलाड़ी है। (यहाँ ‘वह’ सर्वनाम है, जो ‘राम’ के स्थान पर आया है।)
सर्वनाम के भेद (Types of Pronouns)
-
1. पुरुषवाचक सर्वनाम
- उत्तम पुरुष
- मध्यम पुरुष
- अन्य पुरुष
- 2. निश्चयवाचक सर्वनाम
- 3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
- 4. संबंधवाचक सर्वनाम
- 5. प्रश्नवाचक सर्वनाम :
- 6. निजवाचक सर्वनाम:
1. पुरुषवाचक सर्वनाम
जो सर्वनाम शब्द बोलने वाले, सुनने वाले या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होते हैं, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। यह सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर आकर वाक्य के भाव को स्पष्ट करते हैं।
पुरुषवाचक सर्वनाम के प्रकार
हिंदी व्याकरण में पुरुषवाचक सर्वनाम को तीन भेदों में वर्गीकृत किया गया है:
- उत्तम पुरुष: जिस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता (बोलने वाला) स्वयं के लिए करता है। उदाहरण: मैं, हम, मुझे, मेरा, हमारा।
- मध्यम पुरुष: जिस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता सुनने वाले (श्रोता) के लिए करता है। उदाहरण: तू, तुम, आप, तुम्हारा, आपका।
- अन्य पुरुष: जिस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता और श्रोता के अतिरिक्त किसी तीसरे व्यक्ति के लिए किया जाता है। उदाहरण: वह, वे, यह, ये, उसका, उनका।
महत्वपूर्ण तथ्य और प्रयोग
पुरुषवाचक सर्वनाम के प्रयोग से संबंधित कुछ प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं:
- आदर प्रकट करने के लिए एकवचन के स्थान पर बहुवचन सर्वनाम ‘आप’ का प्रयोग किया जाता है।
- तू का प्रयोग अत्यंत निकटता, प्रेम या निरादर प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
- जब सर्वनाम के साथ कारक चिह्नों का प्रयोग होता है, तो उनका रूप बदल जाता है, जैसे ‘मैं’ से ‘मुझको’ या ‘मुझसे’।
- मैं का बहुवचन रूप हम होता है, जो समूह का बोध कराता है।
- अन्य पुरुष के सर्वनाम संकेतवाचक भी हो सकते हैं यदि वे किसी निश्चित वस्तु की ओर इशारा करें।
कारक के अनुसार रूप परिवर्तन
पुरुषवाचक सर्वनाम के विभिन्न कारकों में रूप इस प्रकार बदलते हैं:
- कर्ता कारक: मैंने, हमने, तूने, तुमने, उसने, उन्होंने।
- कर्म कारक: मुझे, हमें, तुझे, तुम्हें, उसे, उन्हें।
- संबंध कारक: मेरा, हमारा, तेरा, तुम्हारा, उसका, उनका।
2. निश्चयवाचक सर्वनाम
जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित वस्तु, व्यक्ति या पदार्थ का बोध होता है, उन्हें निश्चयवाचक सर्वनाम कहा जाता है। ये शब्द किसी संज्ञा की ओर स्पष्ट रूप से संकेत करते हैं, इसलिए इन्हें संकेतवाचक सर्वनाम भी कहा जाता है।
मुख्य भेद और वर्गीकरण
निश्चयवाचक सर्वनाम को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:
- निकटवर्ती निश्चयवाचक: जो शब्द पास की वस्तुओं या व्यक्तियों का बोध कराते हैं। जैसे: यह (एकवचन) और ये (बहुवचन)।
- दूरवर्ती निश्चयवाचक: जो शब्द दूर स्थित वस्तुओं या व्यक्तियों की ओर संकेत करते हैं। जैसे: वह (एकवचन) और वे (बहुवचन)।
निश्चयवाचक सर्वनाम के प्रमुख उदाहरण
वाक्यों में इनका प्रयोग निम्नलिखित रूप में देखा जा सकता है:
- यह मेरी पुस्तक है। (निकटता का बोध)
- वह राम का घर है। (दूरी का निश्चित बोध)
- ये फल मीठे हैं। (पास की वस्तुओं का समूह)
- वे मैदान में खेल रहे हैं। (दूर के व्यक्तियों का समूह)
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध नहीं होता है, उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। इसमें वक्ता को वस्तु या प्राणी की वास्तविक स्थिति या संख्या का स्पष्ट ज्ञान नहीं होता है।
मुख्य प्रकार और शब्द
हिंदी व्याकरण में मुख्य रूप से दो अनिश्चयवाचक सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है:
- कोई: इसका प्रयोग सदैव सजीव प्राणियों के लिए किया जाता है।
- कुछ: इसका प्रयोग प्रायः निर्जीव वस्तुओं, छोटे कीट-पतंगों या अनिश्चित मात्रा के लिए होता है।
वाक्यों में उदाहरण
अनिश्चयवाचक सर्वनाम के उपयोग को निम्नलिखित उदाहरणों के माध्यम से समझा जा सकता है:
- बाहर कोई खड़ा है। (व्यक्ति का बोध, पर कौन है यह निश्चित नहीं)
- भोजन में कुछ गिर गया है। (वस्तु का बोध, पर क्या गिरा है यह निश्चित नहीं)
- शायद कोई बुला रहा है।
- बाजार से कुछ ले आना।
- रास्ते में कोई-न-कोई मिल ही जाएगा।
महत्वपूर्ण तथ्य और नियम
1. जब कोई शब्द संज्ञा के ठीक पहले आता है, तो वह सर्वनाम न रहकर सार्वनामिक विशेषण बन जाता है।
2. संयुक्त अनिश्चयवाचक सर्वनाम के रूप में कोई-न-कोई, कुछ-न-कुछ, सब-कुछ और कोई-और जैसे शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है।
3. कोई का प्रयोग बहुवचन के रूप में करने के लिए किन्हीं शब्द का प्रयोग किया जाता है, जैसे – किन्हीं लोगों ने ऐसा कहा था।
4. संबंधवाचक सर्वनाम
वाक्य में प्रयोग किए जाने वाले वे सर्वनाम शब्द जो किसी दूसरी संज्ञा या सर्वनाम के साथ संबंध स्थापित करने के लिए प्रयुक्त होते हैं, उन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहा जाता है। ये शब्द मुख्य रूप से दो उपवाक्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।
प्रमुख संबंधवाचक शब्द और जोड़े
इन सर्वनामों का प्रयोग प्रायः जोड़ों में किया जाता है। प्रमुख शब्द निम्नलिखित हैं:
- जो — सो (या वह)
- जिसकी — उसकी
- जैसा — वैसा
- जितना — उतना
- जिसने — उसने
- जिसका — उसका
महत्वपूर्ण उदाहरण
वाक्यों में इनका प्रयोग इस प्रकार देखा जा सकता है:
- जो बोएगा, सो काटेगा।
- जिसकी लाठी, उसकी भैंस।
- जैसा देश, वैसा भेष।
- जिसने चोरी की, वह पकड़ा गया।
- जितना गुड़ डालोगे, उतना मीठा होगा।
विशेष तथ्य
1. संबंधवाचक सर्वनाम हमेशा मिश्र वाक्यों की रचना में सहायक होते हैं।
2. इन वाक्यों में एक प्रधान उपवाक्य होता है और दूसरा आश्रित उपवाक्य, जो सर्वनाम के माध्यम से जुड़े रहते हैं।
3. आधुनिक व्याकरण में सो के स्थान पर वह का प्रयोग अधिक प्रचलित हो गया है, जैसे- ‘जो सोएगा, वह खोएगा’।
4. ये सर्वनाम कर्ता, कर्म और संबंध के आधार पर अपना रूप परिवर्तित करते हैं, जैसे जिसने, जिसको, जिसका आदि।
5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या घटना के संबंध में प्रश्न पूछने के लिए किया जाता है, उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। यह सर्वनाम के छह प्रमुख भेदों में से एक है। इन शब्दों के प्रयोग से वाक्य प्रश्नवाचक बन जाता है और वाक्य के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाना अनिवार्य होता है।
प्रमुख प्रश्नवाचक शब्द और उनका प्रयोग
प्रश्नवाचक सर्वनाम का चयन इस आधार पर किया जाता है कि प्रश्न किसके विषय में पूछा जा रहा है:
- कौन: इसका प्रयोग मुख्य रूप से सजीव प्राणियों या मनुष्यों के लिए किया जाता है।
- क्या: इसका प्रयोग प्रायः निर्जीव वस्तुओं, पदार्थों या किसी अगोचर विचार के लिए किया जाता है।
- किसने: इसका प्रयोग कर्ता कारक के रूप में प्रश्न पूछने हेतु होता है।
- किसका/किसकी: इनका प्रयोग संबंध दर्शाने और स्वामित्व के बारे में पूछने के लिए किया जाता है।
विभक्ति के आधार पर रूप परिवर्तन
प्रश्नवाचक सर्वनाम कारक चिह्नों के साथ जुड़कर विभिन्न रूप धारण करते हैं। नीचे कुछ प्रमुख रूप दिए गए हैं:
- कर्ता कारक: किसने, कौन
- कर्म कारक: किसको, किसे
- करण कारक: किससे, किसके द्वारा
- संप्रदान कारक: किसके लिए, किसको
- अपादान कारक: किससे (अलग होने के अर्थ में)
- संबंध कारक: किसका, किसकी, किसके
- अधिकरण कारक: किसमें, किस पर
महत्वपूर्ण तथ्य और उदाहरण
वाक्यों में प्रश्नवाचक सर्वनाम की पहचान करना अत्यंत सरल है। उदाहरण के तौर पर:
- “दरवाजे पर कौन खड़ा है?” – यहाँ ‘कौन’ किसी व्यक्ति की ओर संकेत कर रहा है।
- “थैले में क्या रखा है?” – यहाँ ‘क्या’ किसी वस्तु के विषय में प्रश्न है।
- “यह पुस्तक किसकी है?” – यहाँ स्वामित्व का प्रश्न पूछा गया है।
- यदि प्रश्नवाचक शब्द किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बताए, तो वह सर्वनाम न रहकर सार्वनामिक विशेषण बन जाता है।
6. निजवाचक सर्वनाम
जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कर्ता स्वयं के लिए करता है, उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहा जाता है। यह शब्द वाक्य के कर्ता के साथ अपनापन या निजत्व प्रकट करने के लिए प्रयुक्त होते हैं। सरल शब्दों में, जहाँ वक्ता अपने लिए किसी शब्द का प्रयोग करता है, वह निजवाचक की श्रेणी में आता है।
प्रमुख निजवाचक शब्द
हिंदी व्याकरण में निम्नलिखित शब्दों को मुख्य रूप से निजवाचक माना जाता है:
- आप (स्वयं के अर्थ में)
- स्वयं
- खुद
- स्वतः
- निज
प्रयोग के उदाहरण
वाक्यों में इनका प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से देखा जा सकता है:
- मैं अपना कार्य स्वयं करूँगा।
- वह अपने आप ही घर चला गया।
- तुम खुद जाकर देख लो।
- यह मशीन स्वतः चलती है।
- हमें निज भाषा की उन्नति करनी चाहिए।
विशेष नियम और अंतर
निजवाचक सर्वनाम और पुरुषवाचक सर्वनाम में अक्सर भ्रम होता है, जिसे समझना आवश्यक है:
- जब आप शब्द का प्रयोग श्रोता को आदर देने के लिए किया जाता है, तो वह मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम होता है।
- जब आप शब्द का प्रयोग कर्ता अपने स्वयं के कार्य या स्थिति के लिए करता है, तब वह निजवाचक कहलाता है।
- निजवाचक सर्वनाम का प्रयोग तीनों पुरुषों (उत्तम, मध्यम और अन्य) के साथ किया जा सकता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य वाक्य में बल देना या व्यक्ति के स्वयं के योगदान को स्पष्ट करना होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. निजवाचक सर्वनाम अविकारी नहीं होते, लिंग और वचन के अनुसार इनके कुछ रूपों में परिवर्तन संभव है, जैसे अपना, अपनी, अपने। 2. वाक्य में स्वयं और खुद का प्रयोग क्रिया विशेषण की भांति भी हो सकता है। 3. निज शब्द का प्रयोग प्रायः अधिकार या स्वामित्व दर्शाने के लिए किया जाता है।