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पठार (Plateaus)

1. परिचय: पठार क्या हैं? (Introduction: What are Plateaus?)

एक पठार एक ऊँची समतल भूमि होती है। यह एक विस्तृत, ऊँचा भू-भाग होता है जिसका शीर्ष सपाट या लहरदार होता है और कम से कम एक तरफ तीव्र ढलान होती है। पठार पहाड़ों से इस मायने में भिन्न होते हैं कि उनका शिखर व्यापक और सपाट होता है, जिसके कारण उन्हें अक्सर ‘टेबललैंड’ (Tableland) भी कहा जाता है। ये पृथ्वी पर प्रमुख भू-आकृतियों में से हैं और दुनिया के लगभग 18% भू-भाग को कवर करते हैं।

2. पठारों का वर्गीकरण (Classification of Plateaus)

पठारों को उनकी निर्माण प्रक्रिया और भौगोलिक स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

A. अंतरापर्वतीय पठार (Intermontane Plateaus)

ये पठार चारों ओर से पर्वत श्रृंखलाओं से घिरे होते हैं। ये दुनिया के सबसे ऊँचे और सबसे विस्तृत पठार हैं। इनका निर्माण तब होता है जब पर्वत निर्माण प्रक्रियाओं के दौरान भूमि का एक बड़ा हिस्सा ऊपर उठ जाता है।

  • उदाहरण: तिब्बत का पठार (दुनिया का सबसे ऊँचा, जिसे ‘दुनिया की छत’ कहते हैं), बोलीविया का पठार (एंडीज पर्वतों के बीच), और कोलंबिया-स्नेक पठार (उत्तरी अमेरिका)।

B. गिरिपद पठार (Piedmont Plateaus)

ये पठार एक तरफ ऊँचे पर्वतों से और दूसरी तरफ मैदान या समुद्र से घिरे होते हैं। इनका निर्माण पर्वतों के अपरदन से प्राप्त मलबे के जमाव से होता है।

  • उदाहरण: पेटागोनिया का पठार (एंडीज के पूर्व में), मालवा का पठार (विंध्य और अरावली के बीच), और पीडमोंट पठार (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

C. महाद्वीपीय पठार (Continental Plateaus)

ये विशाल पठार होते हैं जो आसपास के मैदानों या समुद्रों से अचानक ऊँचे उठते हैं। इन्हें ‘शील्ड’ (Shields) भी कहा जाता है क्योंकि ये प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों से बने होते हैं।

  • उदाहरण: दक्कन का पठार (भारतीय प्रायद्वीप का एक बड़ा हिस्सा), छोटा नागपुर पठार, कनाडाई शील्ड, और पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई पठार।

D. ज्वालामुखी पठार (Volcanic Plateaus)

इनका निर्माण दरारी उद्भेदन से निकलने वाले अत्यधिक तरल लावा के क्रमिक प्रवाह और जमाव से होता है। लावा की परतें एक के ऊपर एक जमा होकर एक ऊँची, समतल भूमि का निर्माण करती हैं।

  • विशेषता: इन पठारों की मिट्टी (जैसे काली मिट्टी) बहुत उपजाऊ होती है।
  • उदाहरण: दक्कन ट्रैप (भारत), कोलंबिया-स्नेक पठार (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

3. पठारों का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Plateaus)

A. खनिज संसाधनों के भंडार (Storehouse of Mineral Resources)

अधिकांश प्राचीन पठार (शील्ड) खनिज संसाधनों से भरपूर होते हैं।

  • उदाहरण: छोटा नागपुर पठार को भारत का ‘रूर’ कहा जाता है, जहाँ लोहा, कोयला, और मैंगनीज के विशाल भंडार हैं। अफ्रीका का पठार सोना और हीरे के लिए प्रसिद्ध है।

B. कृषि और पशुपालन (Agriculture and Animal Husbandry)

  • ज्वालामुखी पठारों पर उपजाऊ काली मिट्टी पाई जाती है, जो कपास, गन्ना और तिलहन जैसी फसलों के लिए उत्कृष्ट है (जैसे दक्कन का पठार)।
  • कई पठारों पर व्यापक घास के मैदान होते हैं जो पशुपालन और भेड़ पालन के लिए आदर्श हैं।

C. जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power Generation)

जब नदियाँ पठारों के किनारों से नीचे गिरती हैं, तो वे जलप्रपात (Waterfalls) बनाती हैं, जिनका उपयोग जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जा सकता है।

  • उदाहरण: जोग जलप्रपात (शरावती नदी) भारत में इसका एक प्रमुख उदाहरण है।

D. पर्यटन (Tourism)

कई पठार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, गहरी घाटियों (canyons) और अद्वितीय परिदृश्यों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

4. सारांश: पठारों का अवलोकन

पठार का प्रकार निर्माण प्रक्रिया प्रमुख उदाहरण आर्थिक महत्व
अंतरापर्वतीय पर्वतों के बीच भूमि का उत्थान तिब्बत, बोलीविया पशुचारण, शुष्क खेती
गिरिपद पर्वतों के आधार पर अपरदित मलबे का जमाव पेटागोनिया, मालवा कृषि, खनिज
महाद्वीपीय (शील्ड) प्राचीन भूखंड का उत्थान दक्कन, छोटा नागपुर, कनाडाई शील्ड खनिजों का विशाल भंडार
ज्वालामुखी दरारी उद्भेदन से लावा का जमाव दक्कन ट्रैप, कोलंबिया-स्नेक उपजाऊ काली मिट्टी (कपास की खेती)
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पठार का परिचय (Introduction to Plateaus)

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पठारों का वर्गीकरण (Classification of Plateaus)

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पठारों का वर्गीकरण (Classification of Plateaus)

पठारों के गठन की प्रक्रियाएँ (Processes of Plateau Formation)

तिब्बती पठार (Tibetan Plateau)

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