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पठारों के गठन की प्रक्रियाएँ (Processes of Plateau Formation)

1. परिचय (Introduction)

पठारों का निर्माण एक जटिल भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो पृथ्वी की आंतरिक (Endogenetic) और बाह्य (Exogenetic) शक्तियों की परस्पर क्रिया से होती है। इन प्रक्रियाओं के आधार पर ही पठारों की विभिन्न विशेषताएँ, जैसे उनकी ऊँचाई, संरचना और खनिज संपदा निर्भर करती है। पठार निर्माण की मुख्य प्रक्रियाओं को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

2. आंतरिक शक्तियों द्वारा निर्माण (Formation by Endogenetic Forces)

A. विवर्तनिक उत्थान (Tectonic Uplift)

यह पठार निर्माण की सबसे आम प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें पृथ्वी की सतह का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी खास विरूपण के ऊपर उठ जाता है।

  • महादेशीय संचलन (Epeirogenic Movement): इसमें पृथ्वी की पपड़ी का एक बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे ऊपर उठता है। यह प्रक्रिया महाद्वीपीय पठारों और शील्ड का निर्माण करती है।
    उदाहरण: दक्कन का पठार (भारतीय प्लेट के उत्थान का परिणाम), अफ्रीकी शील्ड।
  • प्लेटों का अभिसरण (Plate Convergence): जब दो महाद्वीपीय प्लेटें टकराती हैं, तो उनके बीच का भूभाग संपीड़न के कारण ऊपर उठकर विशाल अंतरापर्वतीय पठारों का निर्माण करता है।
    उदाहरण: तिब्बत के पठार का निर्माण भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से हुआ।
  • थर्मल अपवेलिंग (Thermal Upwelling): जब मेंटल से गर्म पदार्थ (मेंटल प्लम) ऊपर उठता है, तो यह स्थलमंडल को गर्म करके ऊपर उठा सकता है, जिससे गुंबद के आकार के पठार बनते हैं।
    उदाहरण: कोलोराडो पठार (USA) का उत्थान इसी प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है।

B. ज्वालामुखी क्रिया (Volcanism)

ज्वालामुखी पठारों का निर्माण पृथ्वी की सतह पर लावा के व्यापक प्रवाह से होता है।

  • दरारी उद्भेदन (Fissure Eruption): इसमें लावा किसी एक मुख से निकलने के बजाय लंबी दरारों से बाहर आता है। यह बेसाल्टिक लावा अत्यधिक तरल होता है और दूर तक फैलकर ठंडा हो जाता है। लाखों वर्षों में लावा की कई परतें एक के ऊपर एक जमा होकर एक विशाल पठार का निर्माण करती हैं।
    उदाहरण: दक्कन ट्रैप (भारत), कोलंबिया-स्नेक पठार (USA), और साइबेरियन ट्रैप (रूस)।

3. बाह्य शक्तियों द्वारा निर्माण (Formation by Exogenetic Forces)

बाह्य शक्तियाँ, विशेष रूप से अपरदन, मौजूदा भू-भागों को संशोधित करके पठारों का निर्माण करती हैं।

A. अपरदन (Erosion)

जब किसी ऊँचे भू-भाग, जैसे प्राचीन वलित पर्वत, का लाखों वर्षों तक नदियों, हवा और बर्फ द्वारा अपरदन होता है, तो उसकी कोमल चट्टानें कट जाती हैं और कठोर, प्रतिरोधी चट्टानों का एक सपाट शीर्ष वाला हिस्सा बचा रह जाता है। इन्हें अवशिष्ट पठार (Residual Plateaus) कहा जाता है।

  • नदी अपरदन (Fluvial Erosion): नदियाँ पठारी क्षेत्रों को काटकर गहरी घाटियाँ और कैन्यन बनाती हैं, जिससे पठार विच्छेदित (Dissected) हो जाता है। कोलोराडो पठार इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • वायु अपरदन (Aeolian Erosion): शुष्क क्षेत्रों में, हवा चट्टानों को अपरदित करके पठारी संरचनाओं का निर्माण कर सकती है।

B. हिमानी क्रिया (Glacial Action)

हिमनद अपने रास्ते में आने वाली नरम चट्टानों को खुरचकर हटा देते हैं, जिससे कठोर चट्टानों वाले ऊँचे भू-भाग पठार के रूप में बच जाते हैं। इसके अतिरिक्त, आइसलैंड जैसे क्षेत्रों में, बर्फ की चादर के नीचे ज्वालामुखी विस्फोट से तुया (Tuya) नामक सपाट शीर्ष वाले ज्वालामुखियों का निर्माण होता है, जो बर्फ पिघलने के बाद पठार जैसे दिखते हैं।

4. सारांश: पठार निर्माण की प्रक्रियाएँ

प्रमुख प्रक्रिया उप-प्रक्रिया / क्रियाविधि परिणामी पठार का प्रकार उदाहरण
विवर्तनिक (Tectonic) महाद्वीपीय उत्थान / प्लेट अभिसरण अंतरापर्वतीय / महाद्वीपीय पठार तिब्बत, दक्कन का पठार
थर्मल अपवेलिंग गुंबदाकार पठार (Domed Plateau) कोलोराडो पठार
ज्वालामुखी (Volcanic) दरारी उद्भेदन से लावा प्रवाह ज्वालामुखी / ट्रैप पठार दक्कन ट्रैप, कोलंबिया-स्नेक
अपरदनात्मक (Erosional) प्राचीन पर्वतों का अपरदन अवशिष्ट / विच्छेदित पठार अरावली के कुछ हिस्से, कोलोराडो
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