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पठारों का वर्गीकरण (Classification of Plateaus)

1. परिचय (Introduction)

पठार महत्वपूर्ण द्वितीय-क्रम के उच्चावच (second-order relief features) हैं। उनकी भूवैज्ञानिक संरचना, निर्माण प्रक्रिया और अपरदन के चरण में भारी भिन्नता होती है। सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से, इन विविधताओं को समझना महत्वपूर्ण है। पठारों का वर्गीकरण मुख्य रूप से उनकी निर्माण प्रक्रिया और आयु/अपरदन के चरण के आधार पर किया जाता है।

2. निर्माण प्रक्रिया के आधार पर वर्गीकरण

A. विवर्तनिक पठार (Tectonic Plateaus)

ये पठार पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों, यानी विवर्तनिक गतिविधियों (tectonic activities) के कारण बनते हैं।

  • अंतरापर्वतीय पठार (Intermontane): ये वलित पर्वतों के निर्माण के दौरान दो पर्वत श्रृंखलाओं के बीच भूमि के ऊपर उठने से बनते हैं। ये दुनिया के सबसे ऊँचे पठार हैं।
    उदाहरण: तिब्बत का पठार (हिमालय और कुनलुन शान के बीच), ईरानी पठार (ज़ग्रोस और एल्ब्रुज़ के बीच)।
  • गिरिपद पठार (Piedmont): ये एक तरफ पर्वत और दूसरी तरफ मैदान या समुद्र से घिरे होते हैं।
    उदाहरण: पेटागोनिया का पठार, मालवा का पठार।
  • महाद्वीपीय पठार / शील्ड (Continental / Shield): ये प्राचीन, कठोर क्रिस्टलीय चट्टानों के विशाल भूखंड हैं जो आसपास की भूमि से ऊपर उठे हुए हैं। ये खनिज भंडार के लिए जाने जाते हैं।
    उदाहरण: छोटा नागपुर पठार, कनाडाई शील्ड, साइबेरियन शील्ड।

B. ज्वालामुखी पठार (Volcanic Plateaus)

इनका निर्माण दरारी उद्भेदन (fissure eruption) से निकले अत्यधिक तरल बेसाल्टिक लावा के व्यापक फैलाव और परतों में जमने से होता है। इन्हें बाढ़ बेसाल्ट पठार (Flood Basalt Plateaus) भी कहा जाता है।

  • विशेषता: लावा के अपक्षय से उपजाऊ काली मिट्टी (रेगुर) का निर्माण होता है।
  • उदाहरण: दक्कन ट्रैप (भारत), कोलंबिया-स्नेक पठार (USA), साइबेरियन ट्रैप (रूस)।

C. अपरदित पठार (Erosional Plateaus)

ये पठार तब बनते हैं जब ऊँचे भूभाग (जैसे पर्वत) का लंबे समय तक अपरदन होता है और कठोर चट्टानी हिस्सा एक सपाट शीर्ष वाले पठार के रूप में बचा रह जाता है। इन्हें अवशिष्ट पठार (Residual Plateaus) भी कहते हैं।

  • विच्छेदित पठार (Dissected Plateau): जब कोई पठार नदियों द्वारा गहरी घाटियों और घाटियों में कट जाता है, तो उसे विच्छेदित पठार कहते हैं।
    उदाहरण: कोलोराडो पठार (USA), जहाँ कोलोराडो नदी ने प्रसिद्ध ग्रैंड कैन्यन का निर्माण किया है। कैमूर का पठार भी इसका एक उदाहरण है।

3. आयु / अपरदन के चरण के आधार पर वर्गीकरण

यह वर्गीकरण पठार के जीवन चक्र को दर्शाता है।

  • युवा पठार (Young Plateaus): ये अभी भी उत्थान की प्रक्रिया में हो सकते हैं। इनकी सतह लगभग समतल होती है, और नदियाँ गहरी और संकरी ‘V’ आकार की घाटियाँ बनाती हैं। उदाहरण: कोलोराडो पठार।
  • प्रौढ़ पठार (Mature Plateaus): इस चरण में, अपरदन अधिक सक्रिय होता है। घाटियाँ चौड़ी होने लगती हैं और पठार का मूल समतल स्वरूप विच्छेदित होने लगता है। उदाहरण: Appalacian पठार (USA)।
  • वृद्ध पठार (Old Plateaus): ये लंबे समय तक अपरदन का परिणाम होते हैं। इनकी ऊंचाई कम हो जाती है और सतह लगभग एक समतलप्राय मैदान (Peneplain) जैसी हो जाती है, जिस पर कठोर चट्टानों के अवशेष (Monadnocks) दिखाई दे सकते हैं। उदाहरण: रांची का पठार।

4. सारांश: पठारों का व्यापक वर्गीकरण

वर्गीकरण का आधार प्रकार निर्माण प्रक्रिया उदाहरण
निर्माण प्रक्रिया विवर्तनिक (Tectonic) पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों द्वारा उत्थान तिब्बत, छोटा नागपुर, मालवा
ज्वालामुखी (Volcanic) दरारी उद्भेदन से लावा का जमाव दक्कन ट्रैप, कोलंबिया-स्नेक
अपरदित (Erosional) ऊँचे भूभाग का लंबे समय तक अपरदन कोलोराडो, कैमूर
आयु / अपरदन चक्र युवा (Young) उत्थान जारी, संकीर्ण घाटियाँ कोलोराडो पठार
प्रौढ़ (Mature) चौड़ी घाटियाँ, विच्छेदित सतह Appalachian पठार
वृद्ध (Old) कम ऊंचाई, समतलप्राय मैदान जैसा रांची का पठार

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