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बीज और तकनीक (Seeds and Agricultural Techniques)

बीज और तकनीक (Seeds and Agricultural Techniques)

परिचय: बीज कृषि का सबसे मौलिक और महत्वपूर्ण इनपुट है। गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक कृषि तकनीकें मिलकर फसल उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आय में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत ने हरित क्रांति के बाद से बीज प्रौद्योगिकी और कृषि तकनीकों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

बीज के प्रकार

1. उन्नत बीज (Improved Seeds/HYV)

हरित क्रांति के दौरान विकसित उच्च उपज वाली किस्मों (High Yielding Varieties – HYV) के बीजों ने भारत के खाद्यान्न उत्पादन में क्रांति ला दी। ये बीज उर्वरकों और सिंचाई के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देते हैं।

2. हाइब्रिड बीज (Hybrid Seeds)

ये दो या दो से अधिक भिन्न आनुवंशिक गुणों वाले पौधों के संकरण से विकसित किए जाते हैं। हाइब्रिड बीजों में अक्सर ‘हाइब्रिड विगर’ (Hybrid Vigor) होता है, जिससे वे अपने माता-पिता की तुलना में अधिक उपज देते हैं। हालांकि, किसान हर साल इन बीजों को दोबारा उपयोग नहीं कर सकते और उन्हें हर बार नया खरीदना पड़ता है।

3. जीएम बीज (Genetically Modified Seeds)

इन बीजों को आनुवंशिक इंजीनियरिंग के माध्यम से संशोधित किया जाता है ताकि उनमें वांछित गुण (जैसे कीट प्रतिरोध, सूखा सहिष्णुता) डाले जा सकें। भारत में, व्यावसायिक खेती के लिए स्वीकृत एकमात्र जीएम फसल बीटी कपास (BT Cotton) है।

बीज उत्पादन एवं वितरण प्रणाली

भारत में एक सुस्थापित बीज उत्पादन श्रृंखला है:

  • प्रजनक बीज (Breeder Seed): यह मूल बीज है जिसे कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित किया जाता है।
  • आधार बीज (Foundation Seed): प्रजनक बीज से तैयार किया जाता है।
  • प्रमाणित बीज (Certified Seed): आधार बीज से तैयार किया जाता है और किसानों को वितरित किया जाता है।

संस्थाएं: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य कृषि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय बीज निगम (NSC), और निजी क्षेत्र की कंपनियां इस प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आधुनिक कृषि तकनीकें

1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation)

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी तकनीकों से पानी की दक्षता बढ़ती है, जिससे ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का लक्ष्य प्राप्त होता है।

2. प्रिसिजन फार्मिंग (Precision Farming)

इसमें जीपीएस, सेंसर, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी जैसी तकनीकों का उपयोग करके खेत के प्रत्येक हिस्से की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार सटीक मात्रा में पानी, उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

3. कृषि यंत्रीकरण (Farm Mechanization)

ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य मशीनों का उपयोग श्रम की कमी को दूर करने, समय बचाने और दक्षता बढ़ाने में मदद करता है।

सरकारी पहल

  • बीज ग्राम योजना (Seed Village Programme): स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन और उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM): चावल, गेहूं, दालों और मोटे अनाज की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत बीजों और बेहतर प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना।
  • कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM): किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान करना।

अभ्यास प्रश्न (MCQs)

1. हरित क्रांति में किस प्रकार के बीजों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
  • (a) परंपरागत बीज
  • (b) उच्च उपज वाली किस्में (HYV)
  • (c) जीएम बीज
  • (d) हाइब्रिड बीज
2. भारत में व्यावसायिक खेती के लिए स्वीकृत एकमात्र जीएम फसल कौन सी है?
  • (a) जीएम सरसों
  • (b) जीएम बैंगन
  • (c) बीटी कपास
  • (d) जीएम चावल
3. ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का लक्ष्य किस कृषि तकनीक से संबंधित है?
  • (a) कृषि यंत्रीकरण
  • (b) सूक्ष्म सिंचाई
  • (c) प्रिसिजन फार्मिंग
  • (d) जैविक खेती
4. किसानों को वितरित किए जाने वाले अंतिम बीज को क्या कहा जाता है?
  • (a) प्रजनक बीज
  • (b) आधार बीज
  • (c) प्रमाणित बीज
  • (d) नाभिकीय बीज
5. ड्रोन और जीपीएस का उपयोग करके खेती करना किसका उदाहरण है?
  • (a) जैविक खेती
  • (b) प्रिसिजन फार्मिंग
  • (c) शुष्क भूमि कृषि
  • (d) झूम खेती

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: भारतीय कृषि में उत्पादकता बढ़ाने में बीज प्रौद्योगिकी की भूमिका का मूल्यांकन करें। जीएम फसलों से जुड़ी नैतिक और नियामक चिंताओं पर भी चर्चा करें। (250 शब्द)
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