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पशुधन जनसंख्या (Livestock Population)

1. परिचय (Introduction)

पशुधन (Livestock) से तात्पर्य उन पालतू जानवरों से है जिन्हें भोजन, फाइबर और श्रम जैसे आर्थिक लाभों के लिए पाला जाता है। भारतीय कृषि में पशुधन का एक अभिन्न अंग है, जो ग्रामीण परिवारों के लिए आय, रोजगार और पोषण सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करता है। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी पशुधन आबादी है।

2. 20वीं पशुधन जनगणना, 2019 (20th Livestock Census, 2019)

भारत में पशुधन की गणना हर पांच साल में की जाती है। 20वीं पशुधन जनगणना 2019 में आयोजित की गई थी, और यह डेटा का सबसे हालिया आधिकारिक स्रोत है। इसके अनुसार, भारत में कुल पशुधन आबादी 535.78 मिलियन है, जो 2012 की जनगणना से 4.6% अधिक है।

3. प्रमुख पशुधन प्रजातियाँ और शीर्ष राज्य (Major Livestock Species & Top States)

पशुधनकुल जनसंख्या (2019)सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्यमहत्वपूर्ण तथ्य
मवेशी (Cattle)192.90 मिलियनपश्चिम बंगालभारत में कुल पशुधन का सबसे बड़ा हिस्सा।
भैंस (Buffalo)109.85 मिलियनउत्तर प्रदेशभारत के कुल दूध उत्पादन में भैंसों का योगदान 50% से अधिक है।
बकरी (Goat)148.88 मिलियनराजस्थान‘गरीबों की गाय’ कहा जाता है।
भेड़ (Sheep)74.26 मिलियनतेलंगानामुख्य रूप से ऊन और मांस के लिए पाली जाती है।
सूअर (Pig)9.06 मिलियनअसममुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों में महत्वपूर्ण।
कुक्कुट (Poultry)851.81 मिलियनतमिलनाडुअंडे और मांस का प्रमुख स्रोत। पशुधन जनगणना में इसे अलग से गिना जाता है।

4. पशुधन का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Livestock)

  • आय और रोजगार: यह क्षेत्र भारत में करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर महिलाओं के लिए आय का एक स्थिर स्रोत प्रदान करता है।
  • खाद्य आपूर्ति: यह दूध, मांस और अंडे जैसे उच्च-प्रोटीन खाद्य पदार्थ प्रदान करके देश की पोषण सुरक्षा में योगदान देता है।
  • कृषि में उपयोग: बैल जैसे पशु आज भी कई क्षेत्रों में जुताई और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • कच्चा माल: यह चमड़ा, ऊन और हड्डी जैसे उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करता है।
  • खाद: पशुओं का गोबर एक उत्कृष्ट जैविक खाद है जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है।

5. सरकारी पहल (Government Initiatives)

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission): स्वदेशी मवेशियों की नस्लों के विकास और संरक्षण पर केंद्रित है।
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission): पशुधन क्षेत्र के सतत विकास के लिए एक व्यापक मिशन।
  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF): डेयरी प्रसंस्करण, मांस प्रसंस्करण और पशु चारा संयंत्रों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए।
  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP): खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस को नियंत्रित करने के लिए।

6. पशुधन क्षेत्र में चुनौतियाँ (Challenges in the Livestock Sector)

  • कम उत्पादकता: भारत में पशुधन की आबादी विशाल है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता (जैसे दूध) कई अन्य देशों की तुलना में कम है।
  • चारे की कमी: हरे चारे और उच्च गुणवत्ता वाले फ़ीड की कमी एक बड़ी समस्या है।
  • पशु रोग: खुरपका-मुंहपका जैसे संक्रामक रोग उत्पादकता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
  • असंगठित क्षेत्र: अधिकांश पशुधन पालन पारंपरिक और असंगठित है, जिसमें आधुनिक प्रथाओं का अभाव है।

7. पशुधन से संबंधित क्रांतियाँ (Revolutions related to Livestock)

  • श्वेत क्रांति (White Revolution): दूध उत्पादन में वृद्धि (ऑपरेशन फ्लड)।
  • गुलाबी क्रांति (Pink Revolution): मांस और पोल्ट्री प्रसंस्करण।
  • रजत क्रांति (Silver Revolution): अंडा उत्पादन।

8. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)

  • भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी पशुधन आबादी है।
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है।
  • कुल पशुधन आबादी में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है।
  • मवेशियों की सर्वाधिक संख्या पश्चिम बंगाल में है।
  • भैंसों की सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है।
  • बकरियों की सर्वाधिक संख्या राजस्थान में है।
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