शैलेश मटियानी: जीवन परिचय
हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार शैलेश मटियानी का जन्म 14 अक्टूबर 1931 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ‘बाड़ेछीना’ गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम रमेशचंद्र सिंह मटियानी था। वे आधुनिक हिंदी साहित्य के उन विरल लेखकों में से हैं, जिन्होंने अभावों और संघर्षों के बीच रहकर अपनी लेखनी से समाज के उपेक्षित वर्ग को स्वर दिया।
- जन्म: 14 अक्टूबर 1931
- जन्म स्थान: बाड़ेछीना, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
- मृत्यु: 24 अप्रैल 2001 (दिल्ली)
- साहित्यिक पहचान: आंचलिक कथाकार और यथार्थवादी लेखक।
साहित्यिक विशेषताएँ
मटियानी जी की रचनाओं में उत्तराखंड की पहाड़ियों से लेकर मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों तक का जीवंत चित्रण मिलता है। उन्हें ‘मजदूरों और सर्वहारा वर्ग का कथाकार’ माना जाता है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में व्यवस्था के प्रति आक्रोश और मानवीय संवेदनाओं का गहरा पुट मिलता है।
लेखन की मुख्य विधाएँ
- उपन्यास: लगभग 30 से अधिक उपन्यासों की रचना।
- कहानी संग्रह: 28 से अधिक कहानी संग्रह प्रकाशित।
- निबंध और संस्मरण: विभिन्न सामयिक विषयों पर विचारोत्तेजक लेखन।
- पत्रिका संपादन: उन्होंने ‘विकल्प’ और ‘जनपक्ष’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
प्रमुख कृतियाँ
महत्वपूर्ण उपन्यास
मटियानी के उपन्यास सामाजिक यथार्थ के ठोस धरातल पर टिके हुए हैं:
- बोरीवली से बोरीबंदर तक (1959): यह उनका पहला और सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है, जो मुंबई के फुटपाथों पर रहने वालों के जीवन पर आधारित है।
- कबूतरखाना: इसमें मुंबई की चालों (Chawls) के जीवन का चित्रण है।
- मुठभेड़: पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ पर प्रहार।
- छिन्नमस्ता: स्त्री मनोविज्ञान और सामाजिक बंधनों का विश्लेषण।
- सर्पगंधा: पहाड़ी जीवन की विसंगतियों का अंकन।
प्रमुख कहानी संग्रह
उनकी कहानियाँ आम आदमी के संघर्ष और पीड़ा को दर्शाती हैं:
- मेरी तैंतीस कहानियाँ
- दो दुखों का एक सुख
- चील
- अहिंसा
- महाभोज (यह कहानी संग्रह है, प्रसिद्ध उपन्यास महाभोज मन्नू भंडारी का है)
- हारे हुए
सम्मान एवं पुरस्कार
हिंदी साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मानों से नवाजा गया:
- फणीश्वरनाथ रेणु पुरस्कार: बिहार सरकार द्वारा।
- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार: विभिन्न कृतियों के लिए।
- शारदीय सम्मान: उनके समग्र साहित्यिक योगदान हेतु।
- उन्हें मरणोपरांत भी कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
मुख्य बिंदु:
- शैलेश मटियानी को “आधुनिक युग का प्रेमचंद” भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने भी प्रेमचंद की तरह दलितों और शोषितों के प्रति गहरी सहानुभूति दिखाई।
- उन्होंने मुंबई के संघर्षपूर्ण जीवन को हिंदी साहित्य में पहली बार इतनी व्यापकता के साथ स्थान दिया।
- उत्तराखंड सरकार ने उनकी स्मृति में “शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार” की स्थापना की है।
- उनका संपूर्ण साहित्य “मटियानी रचनावली” के रूप में कई खंडों में प्रकाशित हो चुका है।


